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पहली बार सत्ता ने दिखाया ऐसा रौद्र रूप … बौद्धों के हत्यारों को शरण देने वाला पूरा परिवार जेल में

अवैध रूप से घुसपैठ करके देश को तबाह कर रहे आक्रान्ताओं के खिलाफ सत्ता अब रौद्र रूप अख्तियार करती हुई नजर आ रही है. उत्तर प्रदेश के आगरा में रोहिंग्याओं को शरण देने वाले एक पूरे परिवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इस परिवार के लोग आठ साल से रुनकता में सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर अवैध रूप से रह रहे थे. इन्होंने वोटर कार्ड, आधार कार्ड और जाति प्रमाणपत्र बनवा लिए थे. एक ने तो एक प्लॉट और दो गाड़ियां भी खरीद ली थीं.

बता दें कि पांच दिन पहले फोर्ट स्टेशन से 16 रोहिंग्या मुस्लिम पकड़े गए थे. इनके पास शरणार्थी कार्ड होने के कारण इन्हें छोड़ दिया गया. ये सभी रुनकता में सईदुल गाजी (40) के पास जाकर रहने लगे. खुफिया पुलिस ने गाजी के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि वो बांग्लादेशी है. सईदुल गाजी मूलरूप से बांग्लादेश के खुन्ना जिले का रहने वाला है.  उसके साथ उसकी पत्नी और बेटे शमीम (20) को गिरफ्तार किया गया है. इनके साथ तीन नाबालिग बच्चे और हैं. इन्हें नहीं पकड़ा गया है. इन्हें शेल्टर होम भेजा जाएगा. गाजी ने मीडिया के कैमरों के सामने दो दिन पहले यह कुबूल कर लिया था कि वो मूलरूप से बांग्लादेश का रहने वाला है। वो यह भी कह रहा था कि अब तो यहां आराम से रह सकता है क्योंकि उसके आधार कार्ड सहित तमाम दस्तावेज बन गए हैं.

इतना ही नहीं, उसने बताया था कि वो आठ साल पहले बंग्लादेश से 20 हजार रुपये लेकर चला था. अब उसके पास प्लॉट और गाड़ियां हैं. उसका वीडियो देखने के बाद ही पुलिस हरकत में आई. गाजी से पूछताछ के हवाले से पुलिस ने बताया कि वो 15 साल पहले बांग्लादेश से कोलकाता आया. वहां काम नहीं मिला तो मथुरा के गांव बाद पहुंचा, वहां झोंपड़ी बनाकर रहा. आठ साल पहले रुनकता पहुंचा और सड़क किनारे रहने लगा. यहां कबाड़े का काम कर रहा था. उसने यहीं पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड, जाति प्रमाणपत्र बनवाया. बैंक खाता खुलवाया, एक प्लॉट खरीदा और कबाड़ के काम के लिए दो गाड़ियां खरीदीं. गाड़ियों के लिए बैंक से लोन भी लिया. खुफिया विभाग ने सूचना दी है कि यहाँ और भी बांग्लादेशी हो सकते हैं जिसके बाद पुलिस जांच में जुट गयी है.

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