इस बार मॉब लिंचिंग दलित युवक के खिलाफ और करने वाली मुस्लिमों की भीड़..

ये घटना शायद मॉब लिंचिंग इसलिए नहीं है क्योंकि इस घटना में पीड़ित हिन्दू(दलित) हैं तथा उन्हें पीटने वाले मुस्लिम. लेकिन अगर यहां उल्टा होता अर्थात पीड़ित पक्ष मुस्लिम होता तथा आरोपी हिन्दू समाज से होते तो अभी तक लोकतंत्र खतरे में आ गया होता, संविधान की धज्जियां उड़ गईं होती. लेकिन इस बार मॉब लिंचिंग का शिकार दलित युवक बना है तथा ये लिंचिंग करने वाली मुस्लिमों की भीड़ है इसलिए इस घटना पर न तो कथित धर्मनिरपेक्षता तथा लोकतंत्र के पैरोकार कथित बुद्धिजीवी, अवार्ड वापसी गैंग, खान मार्केट गैंग कुछ बोल रही है और न ही दलितों की कथित ठेकेदार मायावती तथा भीम आर्मी.

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मामला उत्तर प्रदेश के अमेठी का है जहाँ 22 जून को ये घटना हुई थी. जानकारी के मुताबिक, नगर के मोहल्ला चौधराना निवासी सशांक पदम भूषण और उनकी पत्नी गायत्री 6 महीने से नगर के मोहल्ला खरका शेखाना में एक भवन में कोचिंग चला रहे हैं. इस कोचिंग सेंटर में नगर के छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं. शुक्रवार की शाम कोचिंग के समय पड़ोस के ही मोहल्ला गोरिया निवासी मंसूर अंसारी, शब्बू, मुन्ना, अकरम, बबलू लाठी डंडे व कुल्हाड़ी से लैस होकर कोचिंग पहुंचे तथा अचानक से कोचिंग संचालक पर हमला कर दिया.

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बताया गया है कि उन्मादी हमलावरों ने दलित कोचिंग संचालक को खींचकर बीच सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा. इस दौरान कोचिंग संचालक को बचाने आई उसकी पत्नी गायत्री, भाई मयंक, बहन सारिका को भी बीच सड़क पर पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया. सूचना पाकर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और हमलावरों में मुन्ना अंसारी को गिरफ्तार कर लिया. वहीं, मौका पाकर अन्य आरोपी फरार हो गए.  कोतवाली प्रभारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि शशांक की तहरीर पर मंसूर अंसारी, सब्बू, मुन्ना, अकरम, बबलू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया तथा एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है.

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