काला बना केरल… एक और हिन्दू नेता पर हुआ वार

केरल में आरएसएस पर हो रहे लगातार हमलों को क्या कहा जाये. प्रदेश में लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. केरल वामपंथी हिंसा के लिए बदनाम है, लेकिन पिछले कुछ समय में हिंसक घटनाओं में चिंतित करने वाली वृद्धि हुई है. खासकर जब से केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सरकार आई है, तब से राष्ट्रीय विचार से जुड़े निर्दोष लोगों और उनके परिवारों को सुनियोजित ढंग से निशाना बनाया जा रहा है.

एक बार फिर वही मामला सामने आया है जब केरल के कन्नूर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता पर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया.यह हमला कन्नूर के कथीरूर में हुआ. आरएसएस कार्यकर्ता का नाम पी एम के परवीन है.परवीन पर मास्क पहने कुछ लोगों ने तब हमला कर दिया जब वह बाइक चला रहे थे.आरएसएस कार्यकर्ता गंभीर हालत में कोझीकोड के एक अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है.

कन्नूर में इस तरह का कोई पहला मामला नहीं है.यहां पिछले महीने में भी एक आरएसएस कार्यकर्ता पर हमला हुआ था. अक्टूबर में भी कन्नूर स्थित भाजपा कार्यालय पर बम से हमला हुआ था, उसमें भी एक आरएसएस कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुआ था.इसी महीने में केरल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जनसुरक्षा यात्रा के शुरू होने के एक दिन पहले ही तीन भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले किए गया था. केरल के नीलेश्वरम शहर में सीपीएम के कार्यकर्ताओं के ऊपर बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला करने का आरोप जायज है.

आपको बता दें की केरल में अमित शाह आरएसएस-भाजपा के कार्यकर्ताओं की हो रही हत्याओं के खिलाफ जनसुरक्षा यात्रा शुरू कर रहे थे. जानकारी के अनुसार कासरगोड के भाजपा जिला सचिव श्रीकांत ने बताया कि बीजेपी कार्यकर्ता जनसुरक्षा यात्रा कार्यक्रम के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 66 के नीलेश्वरम बाजार में पार्टी के झंडा लगाने का काम कर रहे थे.इस बीच सत्ताधारी पार्टी सीपीएम के करीब 20 कार्यकर्ताओं ने आकर हमला कर दिया.

भाजपा कार्यकर्ताओं को बुरी तरह से मारा पीटा गया है, इनमें तीन पार्टी कार्यकर्ता भी घायल हो चुके है.वामपंथी विचार के मूल में तानाशाही और हिंसा है.कम्युनिस्ट पार्टियों ने रूस से लेकर चीन, पूर्वी यूरोपीय देशों, कोरिया और क्यूबा से लेकर भारत के लाल गलियारों में घोर असहिष्णुता का प्रकटीकरण किया है.वामपंथी विचार को थोपने के लिए अन्य विचार के लोगों की राजनीतिक हत्याएं करने में कम्युनिस्ट कुख्यात हैं.

भारत में पश्चिम बंगाल इस प्रवृत्ति का गवाह है और अब केरल में यह दिख रही है.केरल में वामपंथी विचारधारा से शिक्षित माकपा के लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखने वाले लोगों की जिस क्रूरता से हत्या कर रहे हैं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है.

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