मजहबी संक्रमण की गिरफ्त में बरेली… होली पर निकाली गई “श्रीराम बारात” पर उन्मादियों का भीषण हमला, कश्मीरी अंदाज में की पत्थरबाजी

आखिर वो कौन सी सोच है जो किसी भी हाल में देश में उन्माद तथा खून-खराबा करने पर आमादा रहती है? ये सोच कभी अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर उनकी जान लेती है तो कभी बरेली में, कभी राजस्थान में शिवभक्त कांवड़ियों पर हमला कर देती है? सवाल ये भी खड़ा होता है कि आखिर ये सोच आती कहाँ से है? अफ़सोस इस बात का है कि इसके बाद भी ऐसी उन्मादी सोच से ग्रसित समाज के, देश के दुश्मनों को शांतिप्रिय बताया जाता है, सेक्यूलरिज्म का प्रतीक बताया जाता है.

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ऐसी उन्मादी सोच के कहर से उत्तर प्रदेश का बरेली बुधवार को उस समय दहल उठा जब कट्टरपंथी उन्मादियों ने होली को लेकर निकाली जा रही “श्रीराम बारात” पर भीषण हमला कर दिया तथा कश्मीरी अंदाज में पत्थरबाजी कर दी. इसके बाद वहां अफरातफरी मच गई तथा क्षेत्र का माहौल तनावग्रस्त हो गया.  तनाव के मद्देनजर इलाके में बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा. पुलिस उप महानिरीक्षक आर.के. पाण्डेय ने बताया कि मौके पर पुलिसकर्मियों ने पथराव कर रहे लोगों पर हल्का बल प्रयोग करके स्थिति को सम्भाला तथा बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस और अर्द्धसैनिक बल की मौजूदगी में राम बारात को सकुशल गंतव्य की ओर रवाना किया गया.

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बारात में शामिल स्थानीय लोगों का कहना है कि बरेली में “श्रीराम बारात” में शामिल श्रीराम भक्त “श्रीराम जय राम जय जय राम” के नारे लगाते हुए जा रहे थे. इसी बीच उन्मादी तत्वों ने इस बारात को गैर मजहबी मानते हुए उन्मादी नारेबाजी शुरू कर दी. जब इसको रोकने का प्रयास किया तो छतों से बारात पर भीषण पत्थरबाजी शुरू कर दी गई. अचानक हुए इस हमले से अफरातफरी मच गई. इसके बाद जैसे तैसे पुलिस ने आकर स्थिति को संभाला.

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बता दें कि बरेली में सनातन की पावन यात्राओं पर उन्मादियों का हमला कोई पहली बार नहीं हुआ है बल्कि इससे पहले भी उन्मादियों ने शिवभक्त कांवड़ियों पर न सिर्फ हमला किया था बल्कि कांवड़ यात्रा भी रोक दी थी. उन्मादियों ने उस समय महादेव शिव से दुश्मनी निभाते हुए कांवड़ियों को निशाना बनाया था तो अब प्रभु श्रीराम से दुश्मनी मानते हुए श्रीराम भक्तों पर हमला किया गया है. हमले के बाद क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.

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