नक्सली जेएन साईंबाबा की रिहाई के लिए की गई प्रेस कांफ्रेंस में सुदर्शन संवाददाता ने पूंछा सवाल तो मारपीट पर उतारू हो गये वामपंथी

जेएन साईंबाबा.. वो शहरी नक्सली जो दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर था तथा जिसे 2014 में गिरफ्तार किया गया था, इसके बाद महाराष्ट्र की गढ़चिरौली कोर्ट ने उसको तथा उसके 5 अन्य साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. जेएन साईंबाबा को जेल से रिहा कराने के लिए आज वामपंथियों ने प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया था. लेकिन इस प्रेस कांफ्रेंस में वामपंथियों का खौफनाक चेहरा देखने को मिला.

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जेएन साईंबाबा की रिहाई के लिए प्रेस कांफ्रेंस में सुदर्शन की टीम भी गई हुई थी. इसी दौरान सुदर्शन संवाददाता नमित त्यागी के सवाल पर वामपंथी भड़क उठे तथा सुदर्शन संवाददाता के साथ हाथापाई शुरू कर दी. सुदर्शन संवाददाता की गलती सिर्फ इतनी थी कि उनका सवाल वामपंथियों के एजेंडे के मुताबिक़ नहीं था. यही कारण था कि वामपंथी लोग सुदर्शन संवाददाता के साथ मारपीट पर उतारू हो गए तथा उनके साथ धक्का मुक्की शुरू कर दी. बोलने की आजादी के कथित पैरोकार सुदर्शन के सवाल को स्वीकार नहीं कर सके तथा उनके साथ हिंसा पर उतारू हो गये.

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दरअसल हमारे संवाददाता नमित ने सवाल किया था कि  जेएन साईंबाबा पर आरोप लगे थे कि डीयू का प्रोफेसर होने के बाद भी वह नक्सलियों के साथ संपर्क में थे तथा देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त थे. इसके बाद तमाम सबूतों के आधार पर उनको कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, ऐसे व्यक्ति की रिहाई की मांग क्या उचित है? क्या जेएन साईंबाबा की रिहाई देश के लिए खतरा नहीं बनेगी? इस सवाल पर वामपंथी भड़क गये तथा हमारे संवाददाता नमित के साथ धक्कामुक्की शुरू कर दी. नमित ने बताया कि पूरी प्रेस कांफ्रेंस में 3-4 लोगों को छोड़कर बाकी  सभी वामपंथी लोग थे, गुंडे थे. नमित ने बताया कि उनके सवाल  पूंछते ही पीछे से उन पर हमला किया गया तथा इसके बाद उन्हें सवाल नहीं पूंछने दिया गया.

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बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के प्रो. सांई बाबा (51) को 9 मई 2014 को गिरफ्तार किया गया था. इन पर नक्सलियों के बड़े नेताओं से संपर्क में रहने व उनके बीच मध्यस्थ का काम करने का आरोप था. माओवादी संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में इनकी प्रमुख भूमिका बताई गई है. पुलिस आरोप पत्र के अनुसार नक्सली संगठन में सांई बाबा ‘प्रकाश और चेतन’ के नाम से जाना जाता था. सांई बाबा खतरनाक उद्देश्य के लिए हॉलैंड, लंदन, जर्मनी, ब्राजील, अमेरिका, हांगकांग के साथ- साथ जर्मनी का दौरा भी कर चुका था. इन यात्राओं का लक्ष्य तमाम आतंकवादी संगठन खासकर माओवाद से प्रभावित उग्रवादियों को संगठित करना व नेटवर्क को मजबूत बनाना था.

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