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कांग्रेस सरकार आई अपने पुराने अंदाज़ में. मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों का “वन्देमातरम” गाना हुआ प्रतिबंधित

मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को भले ही किसी और बदलाव के लिए वहां के निवासियों ने वोट दिया रहा हो लेकिन उसने अपने पुराने अंदाज़ में आते हुए सबसे पहले भारत माता की पावन पूजा वन्देमातरम को ही प्रतिबंधित कर दिया है . ये आदेश उन सरकारी कर्मचारियों पर लागू किया गया है जो लगभग 14 सालों से एक नियम के जैसे इसका पालन का रहे थे . इसी के साथ कांग्रेस ने अपने इरादे सन २०१९ के चुनावों के लिए भी जाहिर कर दिए हैं .

ज्ञात हो कि भले ही गौ माता के लिए संरक्षण केंद्र आदि की बातें कर के कांग्रेस सरकार मध्य प्रदेश में किला जीत पाई रही हो, इसी के साथ ही राहुल गांधी का नर्म हिंदुत्व भी वहाँ की जीत का मुख्य कारण रहा .. लेकिन सत्ता पाते ही कांग्रेस ने वन्देमातरम को ही निशाने पर लिया है और आदेश आया कमलनाथ का इसके ही खिलाफ . यहाँ ये ध्यान देने योग्य है कि वर्तमान समय में देश के तमाम हिस्से सरकारी भूमि पर मजहबी स्थलों पर कब्जे और सार्वजानिक जगहों पर नमाज़ आदि के चलते बहुत ज्यादा चर्चा में है . लेकिन कमलनाथ व् कांग्रेस की प्राथमिकता में पहले वन्देमातरम ही आया जो चौंकाने वाला है .

मध्य प्रदेश की नई सरकार ने पूर्व सरकार के फैसले को बदलते हुए 14 सालों से चलते आ रहे रिवाज को खत्म कर दिया। सरकार ने मंत्रालय में वंदे मातरम के गायन पर रोक लगा दी। आज नए मुख्य सचिव एसआर मोहंती के पदभार ग्रहण के साथ कर्मचारियों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कमलनाथ वंदेमातरम् में मौजूद हो सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और पहली बार मंत्रालय में महीने की पहली तारीख को वंदे मातरम नहीं गाया गया।

आपको बता दें कि हर महीने की पहली तारीख को मंत्रालय के बल्लभभाई पटेल मार्ग में पुलिस बैंड और गायन समूह के साथ सभी सरकारी कर्मचारी वंदे मातरम गाते हैं, लेकिन आज न तो पुलिस का बैंड राष्ट्रीय धुन बजाने यहां पहुंचा और न ही वंदेमातरम् गायन समूह के सदस्य। हालांकि हमेशा की तरह कुछ कर्मचारी पार्क में जरूर पहुंचें। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार नई सरकार ने इस आयोजन को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए। जिसकी वजह से समान्य प्रशासन विभाग ने भी इससे किनारा कर लिया और 14 सालों में पहली बार यहां वंदे मातरम की गूंज नहीं गूंजी।

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