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रामनवमी भी बंद होने वाली थी वहां . तभी बीच में आ गया हाईकोर्ट

तुष्टिकरण और वोट बैंक की एक नयी इबादत लिखी जा रही है ममता बनर्जी शासित पश्चिम बंगाल में . 

कभी दुर्गा पूजा बंद, कभी मालदा से पलायन , कभी वर्धमान में बम की फैक्ट्री , कभी बार्डर से बंगलादेशियों की इंट्री , कभी हिंदुओं पर हमले तो अब एक नया आदेश . दक्षिण दमदम नगरपालिका ने हिंदुओं को लेकटाउन में रामनवमी की अनुमति नहीं दी . ममता के सख्त तेवर के चलते हिंदुओं की हिम्मत नहीं हुई उनसे याचना करने की अपने अराध्य के कार्यक्रम के आयोजन की .

हार कर रामभक्त कोलकाता हाईकोर्ट पहुचे जहां न्यायमूर्ति हरीश टण्डन ने उन्हें न्याय दिया. न्यायमूर्ति हरीश टण्डन ने दमदम नगरपालिका को बेहद कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि आप की सारी सख्ती केवल हिंदुओं के आयोजन में ही क्यों होती है ? न्यायमूर्ति टण्डन ने जानना चाहा कि क्या नगर पालिका वाले किसी अन्य मंच के लिए भी ऐसे ही करते हैं या केवल रामनवमी के लिए ही सारी सख्ती है वहाँ ?

हिंदुओं ने लेकटाउन – जेसोर रोड की क्रासिंग पर रामलीला की अनुमति मांगी थी पर दक्षिण दमदम नगर पालिका ने ये अनुमति देने से साफ़ मना कर दिया था, फिर आयोजनको ने विधाननगर कमिश्नरेट से अनुमति मांगी , उन्हें वहा से भी बेरंग लौटाया गया. जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो हार कर हिंदुओं ने कलकत्ता हाईकोर्ट की शरण ली जहाँ जस्टिस टण्डन ने उन्हें न्याय दिया . जस्टिस टण्डन ने हिंदुओं के तत्काल बिना विलम्ब के उसी स्थान पर रामनवमी करने की अनुमति देते हुए नगर निगम को एकतरफा फैसले लेने के लिए बेहद कड़ी फटकार लगाई . 

परोक्ष रूप से हाईकोर्ट का ये आदेश बंगाल में हिंदुओं पर ममता सरकार द्वारा हो रहे खुलेआम उत्पीडन और दमन पर के मुहर सी है. 

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