जन्म जन्मांतर का बंधन मात्र कोरे कागज पर लिखे 3 शब्दो से खत्म हो गया ..एक बार फिर से सत्ता को कट्टरपंथ की चुनौती


 


मजहबी कट्टरपंथी ने न सिर्फ एक बार फिर से देश की सत्ता को चुनौती दी है बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट को भी ललकारा है. जहां सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक को अवैध घोषित कर चुका है तथा केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ अध्यादेश लाने की तैयारी में जुटी हुई है, लेकिन देश के तथाकथित कट्टरपंथी लोगों ने शायद कसम खा ली है कि उनके लिए न भारत की सरकार मायने रखती है, न भारत की अदालत मायने रखते हैं बल्कि उनके लिए उनकी मजहबी शरीयत मायने रखती है. यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने के बाद भी तीन तलाक लगातार जारी है.

अब बिहार की राजधानी पटना में तीन तलाक को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. खबर के मुताबिक, पीड़िता को उसके पति ने सादे कागज के एक टुकड़े पर तलाक तलाक तलाक लिखकर घर से निकाल दिया. करीब एक महीने से पीड़िता पटना में अपने दो बेटियों के साथ दर दर की ठोकरें खा रही हैं.पीड़ित महिला के मुताबिक यूपी निवासी उसके पति ने पहली पत्नी रहते प्रेम विवाह कर लिया और फिर शादी के 11 साल बाद अब घर से निकाल दिया है. पीड़िता ने बताया कि पति ने उसे पुलिस में जाने को लेकर धमकी भी दी है और सब कुछ मैनेज कर लेने का दावा किया है.

पीड़िता का कहना है कि अब  उसको समझ नहीं आ रहा कि शादी के 11 साल बाद वह कहां जाए.दो बच्चों की मां पीड़िता ने बताया कि फिलहाल उसका पति यूपी में है और उसका अक्सर पटना आना- जाना लगा रहता है. पीड़िता की मानें तो आज उसकी जिंदगी में अंधेरे के सिवा कुछ नहीं बचा है. महिला अब पीएम मोदी से मदद की गुहार लगा रही है.गौरतलब है पीड़िता का निकाह अखनूर नामक शख्स से 11 साल पहले हुई थी. उसकी दो बेटियां है. पीड़ित का कहना है कि उसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने जीवन को बचाने की उम्मीद है. पीड़ित महिला का कहना है कि सरकार उसके पति को सजा दे तथा उसकी प्रोपर्टी से उसको गुजारा भत्ता दे.


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