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2017 में सबसे ज्यादा राजनैतिक हंगामा कहीं मचा तो वो प्रदेश रहा “बिहार’ .. जानिये क्या और कहाँ ?

बनते-बिगड़ते सियासी समीकरण के बीच कैसा रहा बिहार का 2017 बिहार के लिए 2017 अच्छा रहा या नहीं .. 2017 किसके लिए रहा खुशी वाला साल ? नीतीश कुमार के विरोधी रिश्तों के बीच मंच साझा करना ? नीतिश 17 साल बाद अपने घर लौटे …मोदी जी की प्रशंसा  , दिग्गज नेताओं को भी ‘अर्श’ से ‘फर्श’ पर आते देखा  .. नीतिश के लिए तो अच्छा गुजरा 2017 .. शरद यादव बने बागी तो गंवानी पड़ी अपनी कुर्सी  .. साल के अंतिम में लालू को नहीं मिली खुशीवाली सौगात  .. 2017 में चारे ने लालू की खुशीयों पर लगाया ग्रहण .. ये सब सुर्खियाँ रही बिहार की . जानिये विस्तार से . 

देश की राजनीति में अगर किसी राज्य की राजनीति सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, तो उसमें सबसे आगे बिहार का नाम आएगा… ऐसे तो बिहार की राजनीति में हर साल नए समीकरण बनते और बिगड़ते रहे हैं, लेकिन गुजरे साल के सियासी समीकरणों में आए बदलाव ने न केवल देशभर में सुर्खियां बनी बल्कि बिहार से लेकर देश की राजनीति में हलचल भी पैदा कर दी….राजनीति के इस चौ तारफ खेल में किसने मारी बाजी… 2017 में बिहार किसके लिए रहा अच्छा… 2017 ने किसकी सत्ता को लिया… कौन राजनीति रोटी सेंकने में लगा रहा…. और कौन चारे की रोटी खाने में….  
गुजरा साल न केवल सियासी समीकरणों के उल्टफेर के लिए याद किया जाएगा, बल्कि इस 2017 में लोगों ने कई दिग्गज नेताओं को भी ‘अर्श’ से ‘फर्श’ पर आते देखा… वही बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने इस साल भ्रष्टाचार के एक मामले में राष्ट्रीय जनता दल के नेता और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के घिरते ही बेहद नाटकीय घटनाक्रम में न केवल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, साथ ही अपने घर भी लौटे…. ये वही नितिश है जो मोदी का नाम लेने से भी हिचकिचते थे, उनके साथ खड़े होने से बचाते रहते थे… बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व लालू प्रसाद यादव की राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर बनाए गए महागठबंधन को भी तोड़ दिया… राजनीति खेल में समय- समय पर काफी उतार- चढाव आते है…
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी अगुवाई वाली एनडीए में वे एकबार फिर न केवल शामिल हो गए… बल्कि भाजपा के साथ मिलकर सरकार भी बना ली… 2017 के समीकरण में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी राजद सत्ता से बाहर हो गई… और उनकी मंत्री की कुर्सी छीन गई… नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में नीतीश ने करीब चार साल पहले ही भाजपा का 17 वर्ष का साथ छोड़ दिया था…. वैसे नीतीश का महागठबंधन में रहते केंद्र सरकार के जीएसटी के मुद्दे पर खुलकर समर्थन में आना और एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देना भी इस साल सुर्खियों में रहा…..
वैसे, इस साल के शुरुआत में 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विरोधी रिश्तों के बीच मंच साझा करना, गर्मजोशी से मिलना तथा इस मंच पर राजद के प्रमुख लालू प्रसाद को जगह नहीं दिया जाना भी काफी चर्चा में रहा…. इस मंच से मोदी और नीतीश ने एक-दूसरे की जमकर प्रशंसा की थी….. वैसे, इस साल के शुरुआत में 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विरोधी रिश्तों के बीच मंच साझा करना, गर्मजोशी से मिलना तथा इस मंच पर राजद के प्रमुख लालू प्रसाद को जगह नहीं दिया जाना भी काफी चर्चा में रहा….
इस मंच से मोदी और नीतीश ने एक-दूसरे की जमकर प्रशंसा की थी… लेकिन राजनीति के इस खेल में शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा की सदस्यता भी गंवानी पड़ी… लेकिन वही 2017 जाते-जाते लालू के लिए अच्छा साबित नहीं हो पाया…. बहरहाल, साल के अंतिम समय में बिहार के दिग्गज नेता लालू प्रसाद भी चारा घोटाले के एक मामले में अदालत की नजर में दोषी पाए जाने के बाद सुर्खियों में है…. साथ में 2018 भी लालू की खुशीयां लाता है या नहीं… वैसे, अब नए साल में बिहार की राजनीति में कौन समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगा….  
2017 तो नीतिश के लिए अच्छा रहा लेकिन शरद के लिए और लालू के लिए नहीं…. बिहार के नेताओं के लिए 2017 कैसा भी रहा हो लेकिन अब 2018 से उन्हे काफी उम्मीद है क्या पत्ता 2018 किसी एक नेता को बिहार का पसंदीद नेता बना दे…
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