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“यदि पुलिस की टोपी भगवा रंग में कर दी जाय तो किसी की हिम्मत नहीं जो दंगा करे”- भाजपा नेता के बयान के बाद विवाद

 


श्रीरामनवमी पर बिहार, राजस्थान, बंगाल सहित देश के कई राज्यों में हिंसा जब हुई जब कुछ मजहबी आक्रांताओं ने रामभक्तों की टोली पर हमला कर दिया तथा साम्प्रदायिकता फैलाई. बिहार के औरंगाबाद जिले में भी शांतिपूर्ण तरीके से निकाली जा रही श्रीरामनवमी शोभायात्रा पर आक्रांताओं की भीड़ ने हमला किया, दुकानों में तोड़फोड़ की, आगजनी की. औरंगाबाद में उन्मादियों का कहर इतना ज्यादा बढ़ गया कि सरकार को धारा 144 लगानी पड़ी.

औरंगाबाद में हुई इस बीभत्स घटना को लेकर बिहार BJP के नरता रामाधार सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है जिस लार विवाद खड़ा हो गया है. गौरतलब है कि बिहार के औरंगाबाद में अब जिंदगी पटरी पर लौट रही है. वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी अभी भी वहां कैंप कर रहे हैं. लेकिन अब वहां नये-नये मामले सामने आ रहे हैं. औरंगाबाद मामले को लेकर भाजपा नेता रामाधार सिंह ने जिला प्रशासन को कई तरह के सुझाव दिये थे. इनमें से एक सुझाव तो काफी चौंकानेवाले हैं. उन्होंने पुलिस को भगवा पगड़ी पहनाने का सुझाव दिया था. इसे लेकर सियासत गरम है. हालांकि उन्होंने अपने विरोधी गुट पर भी निशाना साधा है.

औरंगाबाद के भाजपा नेता रामाधार सिंह ने बीएमपी के डीजी गुप्तेश्वर पांडेय से मैसेज कर पूछा है कि ‘क्या यह बात सही नहीं है कि मैंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से आग्रह किया था कि जुलूस में जितने भी पुलिस बल हैं, उनमें से 50% लोगों को सिविल ड्रेस में भगवा पगड़ी बांधकर जुलूस में शामिल किया जाए. ताकि, उपद्रव करनेवाले लोगों की पहचान हो सके और उन्हें रोका जा सके, पर ऐसा नहीं किया गया. क्या यह अधीक्षक महोदय की चूक नहीं है और यदि चूक है तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?’ भाजपा नेता के इस बयान पर बखेड़ा खड़ा हो गया है तथा विपक्षी राजद ने रामाधार सिंह के इस बयान की निंदा की है. राजद का कहना है कि भाजपा हर चीज में भगवा चाहती है जो गलत है. वहीं भाजपा जेट ने अपने बयान का बचाव किया तथा कहा कि मैंने इसलिए पुलिस को भगवा पगड़ी पहनने को बोल्ला था ताकि पुलिस खुद देखे कि आखिर दंगा कर कौन रहा है? उन्होंने कहा कि राजद समाप्ति की ओर है इसलिए हर बात का बतंगड़ बनाने की कोशिश की जा रही है.

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