“कम से कम गुरु और शिष्या में तो हिन्दू और मुसलमान न देखो और वो भी शमशुद्दीन सर तो उसकी दादा की उम्र के हैं”.. लेकिन ये क्या हुआ ?

शमशुद्दीन सरकारी शिक्षक तो बन गया लेकिन उसकी विचारधारा नहीं बदली. एक सरकारी स्कूल में शिक्षक होने के बाद भी शमशुद्दीन महिलाओं को सिर्फ भोग विलास की वस्तु समझता था. क्षेत्र के लोगों के लिए अध्यापक बने मजहबी दुराचारी सोच से ग्रसित शमशुद्दीन ने अपनी हवस की भूख में एक  नाबालिग मासूम बच्ची के जीवन को तबाह कर दिया. समझ नहीं आता कि आखिर वह कौन सी सोच है जिसके लिए महिलाएं एक मनोरंजन का साधन मात्र है? शमशुद्दीन ने ये भी नहीं सोचा कि जिस मासूम के साथ वह इस जघन्य अपराध को अंजाम दे रहा है वो बच्ची उसको सर कहती थी. खैर शमशुद्दीन ने आँखें खोली हैं उन लोगों की जो ये कहते थे किकाम से कम शिक्षकों में तो हिन्दू मुसलमान मत देखिये. शिक्षक कभी हिन्दू या मुसलमान नहीं होता बल्कि शिक्षक शिक्षक होता है.

इंसानियत को शर्मशार करने वाली ये घटना बिहार के जमुई जिले से सामने आयी है. नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का आरोप जिस पड़ोसी किरायेदार शमशुद्दीन पर लगा है जो एक सरकारी स्कूल का शिक्षक है. आरोपी के कमरे मे गंदी स्थिति में जब बच्ची की मां ने देखी तो इस बात का खुलासा हुआ है, जिसके बाद नाबालिग के परिजन और ग्रामीणों ने आरोपी को पड़क कर जमकर पिटाई कर दी. पिटाई करने के बाद आरोपी को ग्रामीणों ने पुलिस को सौंप दिया है. दुष्कर्म का आरोप शमसुद्दीन पर लगा है. वो झाझा इलाके के ही एक सरकारी स्कूल पंचकठिया का प्रभारी है. जानकारी के अनुसार जिले के झाझा थाना इलाके के एक मकान में रहे रही सात साल की बच्ची के साथ अपने परिजनों के साथ एक किराये के मकान में रहती है. इसी मकान मे बतौर किरायेदार आरोपी भी रहते आ रहा है.

पीड़िता बच्ची के परिजनों ने जो थाने मे आवेदन दिया है उसके अनुसार शुक्रवार के दिन खिड़की से जब वो देखे तो आरोपी बच्ची के साथ आपत्तिजनक स्थिति में था, जिसके बाद बच्ची के जब वे लोग जानकारी लिए तो इस बात की जानकारी मिली की यह कुकर्म बीते कई दिनों से होते आ रहा है. आरोपी की उम्र लगभग 43 साल है.
मामला सामने आने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ कर पिटाई करते हुए पुलिस को सौंप दिया है. मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस छानबीन करते हुए कार्रवाई शुरु कर दी है.

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