चारे ने फिर बनाया लालू को बेचारा..चारा घोटाले के चौथे मामले दोषी करार दिए गये लालू

लालू प्रसाद यादव- बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जो स्वयं को राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर, जय प्रकाश नारायण का अनुयायी बताते हैं लेकिन इसके बाद भी वो भ्रष्टाचार का एक अलग ही पर्याय बन चुके है. ये बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि देश की अदालत कह रही है जहाँ उनको चारा घोटाले में दोषी साबित करार दिया गया था वह जेल में बंद हैं और आज चारा घोटाले से सम्बन्धित एक और मामले में अपना फैसला सुनाया है जिसमें लालू यादव को एक बार फिर दोषी ठहरा दिया गया है. 

बिहार के चर्चित चारा घोटाला के दुमका मामले में सोमवार को सीबीआइ की की विशेष अदालत ने आज पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. जगन्‍नाथ मिश्र को सहित 12 आरोपितों को बरी कर दिया, जबकि लालू प्रसाद यादव सहित शेष सभी को दोषी करार दिया गया. बीमारी की वजह से जगन्‍नाथ मिश्र व्हील चेयर पर अदालत पहुंचे तो लालू प्रसाद को एंबुलेंस से अदालत लाए गए. लालू यादव 96 फर्जी वाउचर के जरिए दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.76 करोड़ की अवैध निकासी मामले में दोषी पाए गए हैं. लालू के मुख्यमंत्री रहते ये पैसे जानवरों के खाने के सामान, दवाओं और कृषि उपकरण के वितरण के नाम पर निकाले गए थे जबकि उस समय पैसे के आवंटन की सीमा अधिकतम एक लाख 50 हजार ही थी. काननू विशेषज्ञों की राय में लालू पर जिन धाराओं में दोषर पाए गए हैं, उन्‍हें 10 साल तक की सजा हो सकती है।

सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव सहित दोषियों के खिलाफ सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 21, 22 और 23 मार्च की तिथि निर्धारित की है. अदालत ने कहा है कि सजा के बिंदु पर सुनवाई वीडियो काफ्रेसिंग से होगी. लालू इसके पहले चारा घोटाला के तीन मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं. वे रांची के होटवार जेल में सजा काट रहे हैं. लालू आगे भी चारा घोटाला के दो अन्‍य मामलों में आरोपित हैं, जिनकी सुनवाई चल रही है.
ज्ञात हो कि लालू यादव अब तक चारा घोटाला में तीन मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं. लालू को चाईबासा कोषागार के दो मामलों मामले में पांच-पांच साल तथा देवघर कोषागार मामले में साढ़े तीन साल की सजा मिल चुकी है. दुमका कोषागार में घोटाला मामले में लालू को सजा का एलान 21, 22 व 23 मार्च को होना है. डोरंडा कोषागार से जुड़ा चारा घोटाले का पांचवा मामला सबसे बड़ा है, जिसमें करीब 139.35 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप है. इसके अलावा लालू भागलपुर के एक और मामले में आरोपित हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चारा घोटाला में लगातार तेज सुनवाई हो रही है. इसी का नतीजा है कि चारा घोटाला के मामलों में एक के बाद एक लगाातर फैसले आ रहे हैं.

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