सोचा था कि RJD के नेता हैं तो दबंगई चलती रहेगी…लेकिन पड़ा कोर्ट का डंडा..अब खाली करने पड़ेंगे सरकारी बंगले

पिछले विधानसभा चुनावों में बिहार में RJD तथा JDU ने मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई थी. लेकिन बाद में लालू यादव के पुत्र तथा तत्कालीन नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यदा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद  नीतीश कुमार ने RJD से गठबंधन तोड़ लिया था तथा BJP के साथ पुनः सरकार बना ली थी. RJD के साथ गठबंधन के पहले नितीश कुमार काफी लम्बे समय तक  बीजेपी के सहयोगी तथा बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे.

JDU तथा RJD गठबंधन कि सरकार में RJD कोटे से मंत्री रहे विधायकों को सरकारी बगले आवंटित हुए थे. लेकिन नीतीश कुमार के RJD से अलग होने के बाद उन मंत्रियों को बंगलों को  खाली करना था तथा वो बंगले  बीजेपी कोटे के मंत्रियों को दिए जाने थे लेकिन नोटिस दिए जाने के बाद भी RJD के पूर्व मंत्री बंगलों को खाली नहीं कर रहे थे तथा असंवैधानिक तरीके से उन बंगलों पर कब्जा किये हुए थे. आरजेडी के पूर्व मंत्रियों को भवन निर्माण विभाग की तरफ से 20 सितम्बर 2007 को बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया था लेकिन उन्होंने बंगला खाली नहीं किया.

लेकिन अब इन पूर्व मंत्रियों को बंगला खाली करना ही पड़ेगा. आज पटना हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि 8 पूर्व मंत्री 15 दिन के अंदर बंगला खाली करें. पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा कि यह सभी RJD के पूर्व मंत्री अब सिर्फ विधायक हैं. इसलिए इन्हें  मंत्रियों वाले बंगले नहीं उपयोग किये जाने का कोई अधिकार नहीं है तथा इन्हें विधायक वाले घर आवंटित किये जाएँ. जिन 8 पूर्व मंत्रियों को बंगले खाली करने हैं वो अब्दुल बारी सिद्दीकी, चंद्रिका  राय, अब्दुल गफूर, शिव चन्द्र राम, अनीता देवी, चंद्रशेखर, विजय प्रकाश आलोक मेहता हैं.

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