एक हेडमास्टर जो भरी क्लास में छात्राओं को दिखा रहा था पोर्न फिल्म.. भले #Bollywood रहा खामोश पर जनता ने किया इंसाफ


उसकी दुराचारी मानसिकता तो देखिये, वो एक स्कूल का हेडमास्टर था. उसके ऊपर जिम्मेदारी थी बच्चों को पढ़ाने की, उन्हें उचित शिक्षा देने की, उनकी मजबूत नींव गढ़ने की ताकि ये छात्र आगे चलकर हिंदुस्तान की उन्नति में. हिंदुस्तान की प्रगति में अपना योगदान दे सकें. हर अभिभावक को भी यही उम्मीद रहती है कि वो जिस विद्यालय में अपने बच्चों को भेज रहे हैं, वहां के अध्यापक उनको बच्चों को उचित शिक्षा देंगे लेकिन अगर अध्यापक शिक्षा देने के बजाय छात्र छात्राओं के साथ अश्लीलता करे, उन्हें गंदी फिल्म दिखाए तब उसको क्या कहा जाये?

अफ़सोस, बिहार की राजधानी पटना के एक विद्यालय में ऐसा हुआ है. मामला शाहपुर थाना क्षेत्र के उसरी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा हुआ है. जानकारी के अनुसार लगभग 15 दिन पहले विद्यालय के हेडमास्टर मो. कलीम पांचवीं कक्षा की क्लास लेने पहुंचे. लेकिन हेडमास्टर के वेश में छिपे दुराचारी कलीम ने पढ़ाने के बजाय अपने मोबाइल पर पोर्न साइट खोला और क्लास में मौजूद छात्रों को अश्लील वीडियो दिखाने लगे. कलीम की इस हरकत का क्लास की कुछ छात्राओं ने विरोध किया तो उन्होंने डांट-फटकार लगाई तथा धमकी दी कि घर जाकर यह बात किसी को नहीं बताना. अगर किसी से कही तो परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा. डरी-सहमी छात्रएं खामोश हो गईं.

इसके बाद कलीम की हिम्मत बढ़ गयी तथा वह छात्रों के साथ छेड़खानी करने लगा. शुक्रवार को हिम्मत जुटाकर एक छात्रा ने हेडमास्टर कलीम की करतूत के बारे में अपनी मां को बताया, जिसके बाद उस बच्ची के आक्रोशित अभिभावक स्कूल पहुंचे. उस वक्त कई और अभिभावक अपनी बच्चियों को छोड़ने आए थे।. एक छात्रा के साहस दिखाने पर सभी छात्रएं आपबीती सुनाने लगीं. इसके बाद अभिभावक उग्र हो गए और हेडमास्टर की पिटाई करने लगे. आनन-फानन में दूसरे शिक्षकों ने पुलिस को कॉल किया तथा पुलिस ने आकर कलीम को अभिभावकों के चंगुल से छुड़ाया.

थानाध्यक्ष के मुताबिक आरोपित हेडमास्टर के खिलाफ आइपीसी की धारा 354ए, पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. बीडीओ सुशील कुमार मामले की छानबीन कर रहे हैं. आश्चर्य इस बात का है कि इस शर्मनाक घटना पर न देश का कोई बुद्धिजीवी जुबान खोल रहा है और न ही बॉलीवुड. अगर अध्यापक का नाम कलीम न होकर कमलेश होता तो शायद पुरुस्कार वापसी भी शुरू हो गयी होती. 


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