तुष्टिकरण की राजनीति का है असर..बिहार में जड़े जमा रहा है आतंक..पढ़िए आकड़े

बिहार में मुस्लिम आबादी का बढ़ना राज्य के लिए खतरा बनते जा रहा है. विपक्षी पार्टियों द्वारा अपनाई गयी तुष्टिकरण की राजनीति ने आतंकियों के लिए राज्य को एक महफूज ठिकाना बनाने में अहम भूमिका निभाई, जिसका खामियाजा आज पूरा बिहार भोग रहा है. पिछले कुछ समय से जिस प्रकार राज्य में आतंकी घटनाएं हुई है, उससे साबित होता है कि अब बिहार भी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहद्दीन के आतंकियों के लिए महफूज़ पनाहगाह बनते जा रहा है.

पश्चमी उत्तरप्रदेश के बाद बिहार में भी आतंकी अपनी पैठ जमा रहे है. बिहार पुलिस के अनुसार राज्य में कई जगह आईएम और अन्य आतंकियों के स्‍लीपर सेल काम कर रहे हैं, जो कि पिछले कुछ समय से बिहार में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुके है.

ज्ञात हो की भारत के बिहार राज्य में कुछ सालों से सबसे अधिक आतंकी घटनाएँ हो रही है. बता दें कि प्रमुख घटनाक्रमों में 27 अक्टूबर 2013 को पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री मोदी जब ‘हुंकार रैली’ को संबोधित करने आये थे तो इस दौरान गांधी मैदान सहित पटना में कई जगह लगातार ब्लास्ट हुए.

उसी वर्ष 7 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया सीरियल बम धमाकों से दहल उठा. 27 अगस्त २०१३ को आइएम आतंकी यासीन भटकल बिहार से ही गिरफ्तार किया गया. वहीँ अहमदाबाद धमाकों के आइएम आतंकी तौसीफ को भी बिहार के गया से बीते साल पकड़ा जा चुका है. इतनी घटनाओं के बाद भी आतंकी एक बार फिर 19 जनवरी को बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर को दहलाने की फिराक में थे.

हालाँकि पुलिस की सतर्कता के चलते इस ब्लास्ट को होने से बचा लिया गया, जिसके तीन दिन बाद ही आइएम आतंकी अब्दुल सुभान कुरैशी दिल्ली में पकड़ा गया.

विचारणीय प्रश्न उठता है कि जिस बिहार में 2013 के पहले आतंकवाद की घटनाएं बिल्कुल नहीं थी, वहां अचानक आतंकवाद का केंद्र कैसे बन गया? सूत्रों के मुताबिक बिहार के पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, गोपालगंज, सीवान, पूर्णिया, किशनगंज, आदि कई जिलों में आतंकवाद की जड़ें गहरी होती जा रही हैं. जिसका मुख्या कारण नेपाल की खुली अंतरराष्‍ट्रीय सीमा को माना गया है. खुली सीमा के कारण आतंकियों के लिए बिहार से नेपाल भाग जाना सबसे आसान होता है, जिस कारण बिहार आतंकियों के लिए महफूज बनते जा रहा है.

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