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संसद का शीतकालीन अधिवेशन बन सकता है 3 तलाक के खिलाफ कानून के लिए यादगार …मुस्लिम महिलओं की हसरत भरी निहाग संसद पर

मुस्लिम महिलाओं की तीन तलाक जैसी समस्या को मद्दे नजर रखते हुए हाल ही में मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर विचार किया था और कानून लागू करने की बात की गई थी जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मंजूरी भी दी। इस फैसले से जहा मुस्लिम महिलाओं ने मोदी सरकार के इस फैसले को काफी सराहा वही कुछ मजहबी पुरुषों ने इस फैसले की कड़ी निंदा भी की थी। आपको बता दें मोदी सरकार ने इसी तीन तलाक के मसले में एक और फैसला लिया है जिसमे इस बार के शीतकालीन सत्र में ट्रिपल तलाक को खत्म करने के लिए बिल पेश कर सकती है।

कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक जैसे मामले में कानून बनाने की सलाह दी थी जिसके बाद मोदी सरकार एक और कदम ले रही है जिससे तीन तलाक को खत्म किया जा सकता है। मोदी सरकार तीन तलाक के मामले में खत्म करने के लिए बिल को इस सेशन में पेश करेगी । तीन तलाक पर लोगों की मंजूरी भी ली गई थी जिसमे चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस नजीर ने अल्पमत में दिए फैसले में कहा था कि तीन तलाक धार्मिक प्रैक्टिस है, इसलिए कोर्ट इसमें दखल नहीं देगा। काफी विचार-विमर्श करने के बाद दोनों जजों ने इस फैसले को सराहा और कहा कि इस पर कानून बनना चाहिए इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि तीन तलाक पर छह महीने का स्टे लगाया जाना चाहिए, इस बीच में सरकार कानून बना ले और अगर छह महीने में कानून नहीं बनता है तो स्टे जारी रहेगा।
तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए 5 जजों के बीच सुनवाई की गई जिसके बाद दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे वहीं तीन इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया। इस केस की सुनवाई 11 मई को शुरु हुई थी। जजों ने इस केस में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था जिसका मोदी सरकार अब एक और कढ़ा फैसला ले कर मुस्लिम महिलाओं की तीन तलाक जैसी समस्या का खात्मा कर देगी। 
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