अब उबल पड़े वकील.. रांची में कुरान बांटने का फैसला देने वाले जज की अदालत के बहिष्कार का एलान

इतिहास में पहली बार एसा फैसला आया है जिसमे किसी को सेक्युलर भारत की सेकुलर न्यायप्रणाली में कुरआन बांटने का आदेश मिला हो.. जाति धर्म से ऊपर उठ कर अब तक वकीलों ने कई मामले देखे है जिसमे प्रयागराज कचेहरी के सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र को नबी अहमद मामले में सजा दिलाने के लिए सबने एकजुटता दिखाई थी उसके बाद मुख़्तार अंसारी को कृष्णानंद राय हत्याकांड में रिहा करवाने में भी उसी तरह की सेकुलर प्रणाली ने कार्य किया .. पर अब शायद इस फैसले ने सबको बदल कर रख दिया .

सुदर्शन न्यूज ने जिस खबर को प्रमुखता से दिखाया था उस खबर पर अब राष्ट्रव्यापी विरोध शुरू हो गये हैं और उसमे सबसे आगे ये फैसला देने वाले जज मनीष सिंह है . अभिव्यक्ति की आज़ादी के नकली और एकपक्षीय पैरोकारो की पैरोकारी से बहुत दूर ऋचा पटेल के फेसबुक टिप्पणी मामले में न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार सिंह के 5 कुरान की प्रति बांटने के आदेश के बाद राँची जिले के वकील आंदोलित हो गए हैं। मनीष कुमार सिंह के अदालत का आज बहिष्कार किया गया।

इसी मामले में बोलते हुए सीनियर एडवोकेट रमेश गुप्ता का कहना है कि इस तरह की जमानत की शर्त नहीं लगाई जा सकती है। अगर मामला जमानती हो तो मैजिस्ट्रेट सिर्फ बेल बॉन्ड भरवाकर जमानत देता है। अगर मामला गैर जमानती हो और तब जमानत दी जा रही हो तो फिर मैजिस्ट्रेट को सीआरपीसी के प्रावधान के हिसाब से ही शर्त लगानी होती है। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर ऐडवोकेट एम. एल. लाहौटी का कहना है कि मैजिस्ट्रेट इस तरह की शर्त नहीं लगा सकता।

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