कोलकाता हाईकोर्ट ने ममता से पूछा- “कब तक जलेगा बंगाल ?”

बंगाल में अशांति का माहौल अभी भी कायम है, राज्य और केंद्र सरकार के बीच असंतुलन रिश्ते की वजह से केंद्र सरकार कुछ करने में असक्षम है। दार्जिलिंग में कायम अशांति न रोके जाने से नाराज कोलकता उच्च न्यायालय ने राज्य और केंद्र सरकार पर नाराजगी जाहिर की। मुख्य न्यायाधीश निशिता निर्मल महात्रे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने स्थिति से निपटने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों की भूमिका पर अचरज जाहिर की।
न्यायमूर्ति महात्रे ने कहा कि यह सच है कि पश्चिम बंगाल और केन्द्र सरकार में विभिन्न सरकारे होने के कारण नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घाटी में फैली अराजकता से निपटने के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि भविष्य को लेकर घाटी के लोगो के बीच काफी डर का माहौल बना हुआ हैं और न्यायालय ने सुझाव दिया कि संकट से निपटने के लिए सरकारों को जल्द ही कोई जरूरी कदम उठाना चाहिए।
गोरखा द्वारा जारी आंदोलन के बाद दार्जिलिंग में रह रहे नेपाली समुदाय ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर घाटी में शान्ति बहाल करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की थी। गोरखा जन मुक्ति मोर्चा द्वारा दार्जिलिंग, दुआर्स और तराई को मिलाकर पृथक गोरखालैण्ड बनाने की मांग को लेकर दार्जिलिंग में बुलायी गयी बेमियादी हड़ताल नौ जून से जारी है जिससे वहां का जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
Share This Post