कांग्रेस शासन अपने राज्य में चलाएगा पद्दावती … पंजाब के मुख्यमंत्री बोले – नहीं रोकेंगे स्क्रीनिंग.. सामने आये कांग्रेसी हिंदुत्व के 2 रूप

विरोध के बीच कांग्रेस ने कहा कि यदि इस फिल्म के कुछ दृश्यों से किसी समुदाय की भावना आहत हो रही है तो इस फिल्म के दृश्यों की समीक्षा की जानी

चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता आर पी एन सिंह ने मीडिया द्वारा पद्मावती फिल्म को प्रतिबंधित करने की भाजपा के कुछ विधायकों की मांग के बारे में पूछे जाने पर

कहा, मैंने अभी तक पद्मावती फिल्म नहीं देखी है किंतु निश्चित ही भाजपा सरकार द्वारा गठित सेंसर बोर्ड ने इसे देखा और बिना किसी कटौती के उसे पास कर

दिया।
उन्होंने कहा कि कोई फिल्म किसी समुदाय की भावना को आहत करने वाली नहीं होनी चाहिए क्योंकि फिल्म का मकसद किसी समुदाय की भावना को

आहत करना नहीं होता। सिंह ने कहा, मैं यह बोलना चाहूंगा कि यदि फिल्म के किन्हीं दृश्यों से किसी समुदाय की भावनाएं आहत होती हों तो उनकी समीक्षा की

जानी चाहिए। इसी बीच राजस्थान महिला आयोग की प्रमुख सुमन शर्मा ने सेंसर बोर्ड को पत्र लिखकर शांति-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए फिल्म से जुड़ी

शंकाएं दूर करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक आज़ाद देश है और यहां सभी को अपने व्यापारिक मौके पूरी आज़ादी के साथ चलाने का

अधिकार है परन्तु इसके साथ ही उन्होंने कहा कि फि़ल्म बनाने वालों को अपनी सही जि़म्मेदारी निभानी चाहिए और इतिहास को उचित संदर्भ में पेश किये जाने

को यकीनी बनाना चाहिए। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि चाहे विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भ हो सकते हैं परंतु पूरी तरह गलत ऐतिहासिक तथ्यों को पेश नहीं किया

जाना चाहिए क्योंकि यह सहन नहीं किये जा सकता।

उन्होंने कहा कि इस दौर में यह बात और भी ज़रूरी बन गई है कि ऐतिहासिक तथ्यों को पूरी तरह सही

तरीको साथ पेश किया जाये क्योंकि मौजूदा समय बच्चे पढऩे की जगह ऑडियों विडियों माध्यम के द्वारा ज्ञान प्राप्त करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक पंजाब का संबंध है यहां ‘पद्मावती’ फि़ल्म को रिलीज करने पर कोई भी पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब में वह हर चीज़

दिखाई जा सकती है जो लोगों की धार्मिक भावनावों को ठेस न पहुंचाती हो।

पंजाब में पिछली सरकार द्वारा मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार मीडिया पर संैसरशिप लगाए

जाने पर विश्वास नहीं रखती। उन्होंने कहा कि हर उस मीडिया संस्था को अपनी औपचारिकताओं पूरी करनी चाहीए हैं जो राज्य में अपना कार्य करना चाहती हों।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी को पत्र लिखकर समुन ने कहा है कि उसे यह देखने की जरूरत है कि फिल्म से किसी महिला की गरिमा को

ठेस ना पहुंचे।

राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
करणी सेना के नेता काल्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के पास फिल्म की रिलीज को 3 महीने

के लिए रोकने का अधिकार है। उन्होंने मीडिया से कहा, फिल्म रिलीज हुई तो हम एक दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल बुलाएंगे।

हमारे पास सभी जातियों एवं

समुदायों का समर्थन है। राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री माहेश्वरी ने कहा कि वह फिल्म का कड़ा विरोध करती हैं और दावा किया कि यह पूरी तरह से

रुपए बनाने और मनोरंजन की कोशिश है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा कि रानी पद्मिनी पद्मावती ने 16,000 महिलाओं के साथ जौहर किया था।

उन्होंने लिखा, रानी पद्मिनी महिलाओं के शौर्य और स्वाभिमान की प्रतीक हैं। उनका अपमान किसी को भी स्वीकार नहीं होगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष परनामी ने भी

कहा कि किसी को भी इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।

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