जब एक तरफ़ बने हैं युद्ध के हालात तब उसी समय भारत सरकार के ख़िलाफ़ खड़े हुए हैं आज़म खान

जब दुनिया अलग अलग खेमों में लामबंद हो रही है ,

जब भारत एक तरफ चीन, एक तरफ पाकिस्तान से जंग के मुहाने पर खड़ा है ,

जब चारों तरफ बलिदानियों की विधवाओं की कराह सुनाई दे रही है ,

जब सबकी जुबान पर है कि पाकिस्तान को खत्म करो ..

तब भारत का ही एक राजनेता , जो भारत के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के सबसे कद्दावर नेताओं में गिना जाता हो .

जिसे जनता बार बार विधायक बना कर राष्ट्रहित में कार्य करने का भरोसा जता रही हो ..

वो नक्सल या कश्मीर समस्या पर भारत सरकार ना सही, सेना , पुलिस या CRPF के साथ खड़ा होने के बजाय भारत सरकार को खुली धमकी दे रहा है संयुक्त राष्ट्र संघ में जाने की ..

उस नेता का नाम है मुलायम सिंह यादव के सबसे खास , समाजवादी पार्टी की रीढ़ और रामपुर से वर्तमान विधायक आज़म खान .. अभी हाल में ही आज़म खान के 3 बयान बेहद चर्चा में रहे हैं .

पहला – मेरी सुरक्षा कम कर के मेरे खिलाफ गम्भीर साज़िश रच रही है सरकार ,

दूसरा – यदि मेरी लीज की जमीन और मेरी यूनिवर्सिटी पर सरकारी कब्ज़े का प्रयास हुआ तो डायनामाइट से उड़ा दूंगा पूरा विश्वविद्द्यालय ,

तीसरा – मोदी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ में दुबारा जाऊंगा और दुनिया के आगे बेइज़्ज़त कर दूंगा वर्तमान भारत सरकार को ..

उपरोक्त तीनों बयान उस समय काल के हैं जब सुकमा में नक्सलियों ने हमारे 25 जवानों पर घात लगा कर हमला किया और जब पाकिस्तान ने हमारे 2 जवानों के शरीर से बर्बरता की …ये ठीक वो समय है जब राजनेता तो दूर , व्यापारी , छात्र , बेरोजगार, नौकरीपेशा सब एक स्वर में राष्ट्रीय एकता और सेना के सम्मान की बात करते हुए पाकिस्तान को धूल चटाने की बात कर रहे हैं ..

पर सवाल उठता है कि क्या जनता द्वारा बनाये गए माननीय ही इतना संवेदनहीन हो जायेगे ?

क्या आज़म खान को आज के विषम हालात की जानकारी नहीं है ?

क्या आज़म खान सेना या अन्य जनता के राजनेता नहीं केवल मुसलमानों के प्रतिनिधि हैं ?

क्या आज़म खान के लिए यही समय उचित दिख रहा है अपने गृहयुद्ध छेड़ने के लिए उकसाने जैसी बयानबाज़ी करने का ?

क्या समाजवादी पार्टी का आला कमान जिसमे अखिलेश , मुलायम , रामगोपाल आदि हैं, आज़म को रोकने की या फिलहाल कुछ समय के लिए चुप रहने की हिदायत भी नहीं  दे सकते ।

उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर जनमानस द्वारा आपेक्षित हैं ,,खास कर सेना के जवानों के बलिदान के इस भावुक क्षणों में ..अंत मे बस इतना ही कहना है कि आजम खान जी , आप से ऐसी आशा ना थी ।।

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