स्कूल की पुस्तकों में छप गया कि – “जीजस है हैवान”..बिलबिला पड़ा ईसाई वर्ग

सजब अमेज़ॉन पर हिंदुत्व आस्थाओं का खुला मज़ाक उड़े तब वो चुप ,

कभी कोई भारत के असली चित्र के बजाय कटे कश्मीर की फोटो डाले तब भी वो चुप ,

सेना प्रमुख का अपमान हो तब भी वो चुप,

गौ माता को करोड़ो की आस्था मानने से जिन्हें आपत्ति है उन्होंने गुजरात सरकार की एक लिपिकीय त्रुटि को तूल बना डाला है और इस मामले को अपनी आस्था से जोड़ कर सरकार के सम्बंधित अंग से माफी मांगने की बात करने लगा है ….

गुजरात राज्य स्कूल पाठ्य पुस्तक की नौंवी कक्षा की किताब के हिंदी कोर्स के पेज 16 के गुरु शिष्य परम्परा पर छपे अध्याय में ईसा मसीह को हैवान अर्थात जानवर की श्रेणी में रख दिया गया था जिसके बाद ईसाई समाज पीड़ा से बिलबिला गया और तत्काल इस मामले को ऊपर पहुचाते हुए इस पुस्तक को फौरन बैन करने की मांग करने लगा ..

इसी क्रम में अहमदाबाद शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर भारी संख्या में ईसाई समाज के लोग जमा हुए और उन्होंने जम कर नारे बाज़ी करते हुए इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, उनका कहना था कि ईसा मसीह उनकी आस्था के केंद्र हैं व उनका अपमान कतई बर्दाश्त नहीं होगा ..

गुजरात बोर्ड ने यद्द्पि ऑनलाइन संस्करण से हैवान शब्द हटा लिया है पर उनका कहना है कि स्कूलों में किताबें इतनी बंट चुकी हैं लाखों छात्रों में कि अब उसको वापस लेना सम्भव नहीं है . उन्होंने स्कूलों को कहा कि हैवान शब्द को बच्चों को ना पढ़ाएं ..श्री पैठानी का कहना है कि यह एक लिपिकीय त्रुटि है जिसको ज्यादा तूल न दिया जाय ..

फिलहाल अब कम से कम इस वर्ष तो ये पुस्तकें स्कूलों में चलती रहेगी  ..

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