पहले पुलिस की गाड़ियां फूंकी, अब मज़हब सामने कर पुलिस पर ही लगा रहे अत्याचार का झूठा आरोप. आप भी साथ दें अपने रक्षकों का

बिजनौर के सिपाही कमल शुक्ला की जान के पीछे एक झूठ को ले कर पड़े दंगाईयों ने बिजनौर में पुलिस पर झूठा आरोप लगाना साबित होने के बाद अपने गिरेबान में झांकने या शर्म से सर झुकाने के बजाय एक नया मोर्चा बगल के जिले मुज़फ्फरनगर में खोल दिया है .. इस बार भी उनके निशाने पर है हमारे रक्षक पुलिस के जांबाज़ जवान …

मामला मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश का है .. यहां गांव शेरपुर में 2 मई को पुलिस को गौ हत्या की सूचना मिली थी .. पुलिस ने घर जा कर तलाशी लेनी चाही तो गलती पकड़ी जाने के डर से मुस्लिम समाज के लोग जमा हो गए और पुलिस से ही भिड़ गए .. पुलिस लगातार रक्षात्मक रवैया अपनाती रही तो दंगाईयों के हौसले बढ़ते गए और उन्होंने पुलिस की 2 मोटरसाइकिल जला कर राख कर दी …

इस आतंकी कुकृत्य के बाद वहां के मुस्लिमों ने सीधे तौर पर हर बार की तरह खुद को शरीफ , सज़्ज़न, मासूम , बेचारा कर के दिखाने लगे और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस को बेरहम व कानून से हट कर कार्य करता बताने की कोशिश करने लगे ..

अपराध कर के भी वो चाह रहे थे कि उन्हें दण्ड ना मिले , भले ही वो गौकशी में लिप्त हों या पुलिस पर हमला करने में ..इसीलिए जब पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश डालनी शुरू की तब उन्होंने पुलिस पर ही तमाम उल्टे सीधे आरोप लगाने शुरू कर दिए .. पुलिस पर लगाए गए आरोपो में रायफल से भैंस मार देने , घर मे दीवाल कूद कर आने , गन्दी गन्दी गाली देने व गौ रक्षको के साथ छापा मारने जैसे नकली , झूठे , तथ्यहीन व आधारहीन आरोप हैं …

इस मामले में मुजफ्फरनगर के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस पूरी तरह से नियम , कानून व संविधान की सीमाओं में कार्य कर रही है .., पुलिस के पास इतना समय नहीं है कि वो भैंस से भिड़े न ही पुलिस बल की कमी है जो उसे गौ रक्षको का सहारा लेना पड़े .. उपरोक्त तथ्यों से प्रथम दृष्टया सारे आरोप केवल कार्यवाही से बचने के लिए व उत्तर प्रदेश की कर्तव्यनिष्ठ पुलिस के मनोबल को बिजनौर वाले अंदाज़ में गिराने के लिए लगाए जा रहे हैं …

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