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अखिलेश राज में पुलिस को दी थी गाली, योगी राज में खुली फ़ाइल

क़ानून क्या है , न्याय क्या , शासन क्या है और प्रशासन क्या है शायद अब इन नेता जी को समझ में आ जाये जिन्होंने धृष्टता की हद को पार करते हुए अखिलेश राज में समाजवादी नेता के रुतबे से एक पुलिस के क्षेत्राधिकारी को ना सिर्फ धमकी दी थी बल्कि अशोभनीय और अपशब्द बोल कर अपमानित किया था .

मामला जिला एटा का है जहां के कद्दावर समाजवादी नेता जुगेंद्र सिंह यादव के बेटे पुष्पेंद्र सिंह यादव ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान खुद को समाजवादी नेता की धौंस देते हुए 13 अक्टूबर 2015 को जलेसर में तैनात पुलिस क्षेत्राधिकारी श्री राघवेंद्र चौहान को पहले भद्दी भद्दी गालियां दी , फिर जान से मारने की धमकी दी और फिर सीधे तौर पर बूथ को कैप्चर करने की खुली चुनौती दे डाली . राघवेंद्र चौहान ने सिर्फ शासकीय आदेशों का पालन करते हुए पुष्पेंद्र यादव का वाहन जो मतदान केंद्र के बाहर खड़ा था उसे हटवा दिया था . इसी बात की खुन्नस निकालने के लिए समाजवादी नेता इस स्तर तक गिर गया था . 


गाली गलौज की पूरी रिकार्डिंग होने के बाद पुलिस क्षेत्राधिकारी ने इसकी लिखित शिकायत जिलाधिकारी , पुलिस अधीक्षक से उस समय की थी पर सत्ता की धौंस में दबे किसी भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसमें हाथ डालने और सपा नेता के खिलाफ एक्शन लेने की हिम्मत नहीं की . गली गलौज का आडियो वायरल होने के बाद अपर पुलिस महानिदेशक क़ानून व्यवस्था ने स्वयं इसका संज्ञान लेते हुए थाना सकीट में सपा नेता के खिलाफ 353 / 504 / 135 धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया पर एक बार फिर स्थानीय थाना सत्ता की हनक के आगे कुछ भी नहीं कर सका . 


सत्ता परिवर्तन के बाद से योगी आदित्यनाथ जी के सिर्फ क़ानून के राज की बात पर अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा सत्यार्थ पंकज सिंह ने एक बार फिर समाजवादी नेता का वो पुराना केस फिर से खोलने का आदेश दिया साथ ही इस केस की निष्पक्ष जांच हो इसलिये इसकी विवेचना पुलिस अधीक्षक क्रम श्री अनूप को सौंपी गयी है . पुलिस के कड़े तेवरों के बाद समाजवादी नेताओं में खलबली मची है . इस जांच के दायरे में वो पुलिस अधिकारी भी आ सकते हैं  जिन्होंने तत्कालीन समय में सत्ता के दबाव में समाजवादी नेता के इस गंभीर कुकृत्य को नजरअंदाज किया था . 

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