बुरा समय किसे कहते है ये लालू से पूछे… हाईकोर्ट ने भी वापस लौटाया

पहले तो नीतीश कुमार ने महागठबंधन का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली, जो लालू के लिए एक बड़ा झटका था। वहीं अब दोबारा से लालू यादव को झटका लगा है। दरअसल, राजद द्वारा नीतीश के खिलाफ दायर की गई याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विधानसभा में बहुमत परीक्षण हो चुका है और राज्य सरकार ने अपना विश्वास मत हासिल कर लिया है। अदालत ने कहा कि वह इस स्थिति में कुछ नहीं कर सकती।

अदालत ने यह भी कहा कि अगर आपके पास बहुमत था, तो इसे सदन में साबित करना चाहिए था। केवल यह कहना कि हम सबसे ज्यादा विधायकों की पार्टी हैं, पर्याप्त नहीं है। अदालत ने शुक्रवार को मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद मामला सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया था। याचिका में RJD का तर्क था कि सबसे बड़ा दल होने के नाते उसे सरकार बनाने का न्यौता मिलना चाहिए था और बिहार में सरकार बनाने के लिए राज्यपाल द्वारा नीतीश कुमार की JDU को बुलाने के फ़ैसले पर सवाल उठाया गया था।
वहीं, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दो अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की और दोनों याचिकाओं को हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के महत्वपूर्ण विश्वासमत से पहले दो जनहित याचिकाएं दायर की गई और दोनों के वकीलों ने अदालत में अपना पक्ष रखा। पहली याचिका राजद विधायकों सरोज यादव और चंदन वर्मा की ओर से की गई जबकि दूसरी याचिका समाजवादी पार्टी के सदस्य जितेन्द्र कुमार की ओर से दायर की गई थी। याचिकाओं में अदालत से अनुरोध किया गया था कि राज्य में सरकार बनाने के लिये सबसे बडे दल के नेता को आमंत्रित करने का निर्देश दिया जाए।
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