यकीनन ये बदलाव के लक्षण हैं , अब एक जज पा रहा है गलत निर्णय देने की सज़ा

संवेदनहीनता, गैर अनुशासन कहीं भी हो , किसी भी रूप में हो वो सभ्य समाज मे स्वीकार्य नहीं होती है ..इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश में देखने को मिला ।।

उच्च अदालत की अनुशासन समिति ने बेहद चर्चित और गम्भीर विषय गैंगरेप में पीड़िता की चीखों और तथ्यों को दरकिनार करते हुए अखिलेश सरकार के पूर्व मंत्री व मुलायम सिंह यादव के चहेते गायत्री प्रजापति को ज़मानत देने वाले अपर सत्र न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्रा को सस्पेंड कर के विभागीय जांच बिठा दी है ।।

यदि इस जांच में न्यायाधीश मिश्रा दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही होगी .. जज ओम प्रकाश मिश्रा 30 अप्रैल को रिटायर होने वाले थे वे वर्तमान में पास्को एक्ट के फैसले देने हेतु नियुक्त थे ..

उच्च अदालत ने जज मिश्रा के फैसले को बेहद दोषपूर्ण माना था और तब से ही उन पर कार्यवाही की तलवार लटक रही थी जिसे अब जा कर अंजाम दिया गया है .. गायत्री प्रजापति अपनी सज़ा जेल में काट रहा है और अब पुलिस को उसके गुर्गों की तलाश है ।।

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