कांग्रेस नेता की गौ रक्षक विरोधी याचिका के खिलाफ खडी हुई कर्नाटक की ही कांग्रेस सरकार. गौ रक्षा को सही ठहराया


एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने गौ रक्षकों की गुंडागर्दी को रोकने के लिए याचिका दायर कर के बैन करो , सजा दो जैसी बातें कर रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस शासित एक राज्य कर्नाटक का मुख्यमंत्री सीधे तौर पर खड़ा हो गया है गौ रक्षकों के समर्थन में . उसके द्वारा अदालत में कही गयी बातें कांग्रेस के ही अंदर विचारधारा के दो फाड़ को प्रदर्शित कर रही हैं .

कांग्रेस सरकार कर्नाटक ने अदालत में एक नोटिस के उत्तर में बताया है की – कोई भी व्यक्ति गौ रक्षा कर सकता है यदि उसके पीछे उसकी मानसिकता पवित्र हो तो . गौ रक्षको को अपराधी और गुंडा कहे जाने के तमाम विवादों के बीच एक कांग्रेस शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री का ये लिखित उत्तर कांग्रेस के अंदर ही अलग अलग चल रही २ अलग अलग विचार धाराओं को प्रदर्शित करता है . कर्नाटक सरकार का कहना है की गौ वंश में सिर्फ गाय ही नहीं बल्कि बैल और बछड़े भी शामिल हैं . 

कर्नाटक सरकार ने इसके पीछे कर्नाटक प्रवेन्शन आफ काऊ स्लाटर एन्ड कैटल प्रिजर्वेशन एक्ट 1964 के नियम 15 का हवाला देते हुए कहा है कि गौ वंश की रक्षा हर वो व्यक्ति कर सकता है जिसकी मानसिकता इसके पीछे पवित्र हो . यद्द्पि उन्होंने आगे कहा है कि ये नियम किसी भी प्रकार की हिंसा को कतई समर्थन नहीं करता और क़ानून व्यस्था बिगाड़ने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जा सकती है . 


ज्ञात हो कि कर्नाटक में लगभग 80 गौ शालाएं सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त हैं और पिछले साल सरकार ने इन गौ शालाओं के लिए 7 करोड़ रुपये की स्वीकृति अनुदान के तौर पर स्वीकृति दी थी . 


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