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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई ही चल रही थी तीन तलाक पर . केरल की अदालत ने तो सुना दिया फैसला

जहां एक तरफ इस्लाम का एक धड़ा तीन तलाक को सही बता कर सुप्रीम कोर्ट में उसे हर हाल में लागू करने पर तुला हुआ है और तमाम बयानों में सुप्रीम कोर्ट या सरकार को बीच में ना पड़ने की सलाह दे रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ केरल की एक फैमिली कोर्ट ने बिना किसी के इंतज़ार के ही डाक से भेजे गए तीन तलाक को अमान्य कर के इसे अवैधानिक बताया है . अदालत ने ऐसे कार्य करने वाले शौहर को कानूनी नसीहत देते हुए बताया की उसने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, जिसके कारण उसकी तलाक को वैध नहीं माना जा सकता है । 

मामला केरल के मालाप्पुरम का हैं . यहाँ के रहने वाले अली फैजी ने वर्ष 2012 में अपनी बीबी को स्पीड पोस्ट से ‘३ तलाक’ भेजा था। इसके बाद बीबी ने भारत की कानूनी प्रक्रिया में विश्वास जताते हुए ‘डाक’ से भेजे गए ३ तलाक के पत्र को मानने से साफ़ मना कर दिया । कर्नाटक और केरल उच्च न्यायालयों के पहले के तमाम आदेशों को नजीर मान कर ही निचली फैमिली अदालत ने तलाक देने वाले शौहर अली फैजी की याचिका को खारिज कर दिया क्योंकि वह अदालत में तलाक के सही वजह को परिभाषित नहीं कर पाया …

फैमली कोर्ट के न्यायाधीश श्री रमेश भाई ने शौहर अली फैजी की याचिका को यह बताते हुए खारिज कर दिया की वैध तलाक तब ही हो सकता है, जब पति और पत्नी के बीच समझौते के सारे प्रयास विफल हो चुके हों और कहीं से कोई गुंजाइश नहीं बची हो पर फ़ैज़ी के इस मामले में ऐसा बिलकुल भी होता प्रतीत नहीं हो रहा है .. फैमिली कोर्ट का ये फैसला तीन तलाक की जंग लड़ रही तमाम मुस्लिम महिलाओं के लिए संजीवनी साबित हो सकता है. 

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