कई गद्दारों की पहिचान करा गया बीता क्रिकेट मैच, जैसे ग्वालियर का महबूब अली. पढ़ें उसकी फेसबुक पोस्ट भारत की हार के बाद

कबिरा विपदा हूँ भली , जो थोड़े दिन होय ..

हित अनहित सब जगत में, जान पड़त सब कोय .. 

कबीर के शब्दों को सरल भाषा में कहा जाता है की थोड़े दिन की विपत्ति भी कभी कभी सच्ची शिक्षा दे कर चली जाती है . ठीक यही हुआ है भारत पाकिस्तान के मैच में जहाँ कई जगहों पर छिपे उन गद्दारों की पहिचान हो गयी जिनकी शायद भारत की जीत के बाद पहिचान छिपी रहती . उन्ही में से एक निकला ग्वालियर का गद्दार महबूब अली जिसका शरीर भर केवल भारत में था पर मन और रूह पाकिस्तान में . 

अक्सर ताने मारे जाते हैं की वफादारी का सबूत कौन होता है कोई मांगने वाला पर ईश्वर की इतनी कृपा जरूर है कईयों पर की कई बिना मांगे ही वफादारी का नहीं बल्कि गद्दारी का सबूत देते जा रहे हैं . 

नीचे लिखे जहरीले शब्द पोस्ट कर के महबूब अली मस्ती कर रहा था की अचानक भारत की हार से आहत कुछ लोगों की नजर पड़ गयी उस काली करतूत पर और उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में कर दी और जश्न मानाने का प्लान बनाने वाले महबूब अली को पुलिस स्टेशन ले जाय गया जहाँ उसका जश्न कुछ समय के लिए पुलिस ने जरूर निकाल दिया होगा पर यकीनन पुलिस ही नहीं शायद ही कोई हो जो उसके अंदर छिपे जहर को निकाल सके तो उसने अपने अंदर भारत को डसने के लिए भर रखा है और जिस जहर को रिचार्ज करने के लिए पाकिस्तान को सबसे अच्छी जगह मानता है . 

पढ़िए उस गद्दार महबूब अली की पोस्ट जिसमे वो भारत की हार पर जश्न मानाने और गोश्त की दावत उड़ाने जा रहा था और विचार करिये की किस प्रकार की जहरीली मानसिकता के लोगों के बीच में हम रहते हैं . 

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