3 तलाक है अल्लाह का कानून .सारी दुनिया के उलेमा भी मिल जाएँ तो भी नहीं होगा इसमें बदलाव – असजद रज़ा खान

जहां एक तरफ भारत की तमाम मुस्लिम महिलाओं ने ३ तलाक को खारिज करने की मांग मुख्यमंत्री , प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से ये कह कर न्याय रही हैं कि यह प्रथा उनके साथ प्रताड़ना और अत्याचार है , वहीँ दूसरी तरफ तमाम मौलाना और समाज को अपनी मुट्ठी में रखने की सोच रखने वाले कुछ लोग पीड़िताओं को उनके अधिकार ना देने पर पूरी तरह से और खुल कर आमादा हो गए हैं .

आये दिन एक के बाद एक मौलाना , मुफ़्ती , मोअल्लिम अपनी नयी राय को समाज पर थोपने पर आमादा हो चुके हैं . इसी क्रम में अब इस विवाद में बरेली के ज़मात रज़ा ए मुस्तफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष असजद रजा खान कूद पड़े हैं उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के नियम और ३ तलाक अल्लाह के क़ानून हैं और इसे बदलने का दम अगर पूरी दुनिया के उलेमा भी मिल जाएँ तो भी नहीं होगा . 

उन्होंने कहा कि ३ तलाक पर नहीं बल्कि तलाक के हालातों और परिस्थितियों पर बहस होनी चाहिए . मौलाना ने 1937 के शरीयत एक्ट का हवाला देते हुए बताया कि तलाक , निकाह विरासत आदि के मामले शरीयत के अनुसार सुने और निपटाए जायेगे . इसी क्रम में अमेठी के मौलाना कमर गनी उस्मानी ने लाखों मुस्लिम महिलाओं की बात को अपनी एक बात से दबाते हुए कहा कि ३ तलाक इतना बड़ा मुद्दा नहीं है कि उस पर बहस हो . 

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