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योगीराज में सिपाही नईम ने जब अदालत से माँगा दाढ़ी रख कर ड्यूटी करने का अधिकार तो ये मिला जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अजीब मांग थी ये , एक मुस्लिम पुलिस वाले ने याचिका डाली थी हाईकोर्ट में की उसको अधिकार दिया जाय दाढ़ी रख कर ड्यूटी करने का क्योंकि उसका मज़हब इस्लाम है और दाढ़ी उसकी इस्लामिक शरीयत नियमो में आता है . 

ये प्रकरण बिजनौर जिले का है. बिजनौर पुलिस लाइन में तैनात सिपाही नईम ने दाढ़ी रख कर अपनी ड्यूटी करने की मांग की पर उसे उच्चाधिकारियों ने पुलिस नियमावली बता कर क्लीन शेव में ही रह कर ड्यूटी देने का आदेश दिया. इस आदेश के खिलाफ सिपाही नईम बागी हो गया और उसने अपने विभाग को अदालत में खींच लिया . हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए नईम ने अपने लिए दाढ़ी रख कर ड्यूटी देने की अनुमति मांगी जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति श्री पी के एस बघेल ने पुलिस अधीक्षक बिजनौर को नोटिस जारी करते हुए २ माह के अंदर पुलिस नियमावली के तहत इस मुद्दे पर जवाब माँगा . 

याचिका कर्ता नईम ने अपने समर्थन में कांग्रेस के उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री वीर वहादुर सिंह द्वारा १० अक्टूबर 1985 में बनाया गया पुलिस नियम भी संलग्न किया जिसमे उन्होंने ये आदेश दिया था की यदि सक्षम अधिकारी आदेश करे तो मुस्लिम पुलिस वाला दाढ़ी रख कर काम कर सकता है . हाईकोर्ट ने कांग्रेस द्वारा बनाई गयी इस नियमावली को मानते हुए आदेश दिया की उत्तर प्रदेश में पुलिस वाला दाढ़ी रख सकता है यदि उसका लक्षण अधिकारी अथवा पुलिस अधीक्षक उसको दाढ़ी रखने की अनुमति दे देता है तो . किस को दाढ़ी रखना है या किस को नहीं ये अनुमति और फैसला पुलिस अधीक्षक का होगा  .


हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब पुलिस अधीक्षकों के लिए एक और जिम्मेदारी बढ़ सकती है जिसमे उन्हें स्व विवेक से यह निर्णय लेना होगा की किस मुस्लिम पुलिस वाले को दाढ़ी रखने की अनुमति देनी है और किसे नहीं . फिलहाल कांग्रेस सरकार द्वारा 1985 में बनाया गया नियम अब जा कर उत्तर प्रदेश पुलिस में काम कर रहे तमाम मुस्लिम पुलिस वालों के काम आता दिख रहा है . 

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