शासन ने जब कहा कि जनता को दो पूरा पेट्रोल – डीजल तो अड़ गए पम्प मालिक . देखिए क्या किया

ऐसा नजारा देखना जनता के लिए बेहद जरूरी है और उसे समझना और भी ज्यादा जरूरी ..ये उनकी ख़ून पसीने की कमाई और उनकी जमापूंजी से जुड़ी खबर है ..

राजधानी पर जमाने से चिप लगा कर डीजल पेट्रोल की चोरी कर के आम जनता की जेब पर डाका डाला जाता था ..  लाखों का मुनाफा कमाने वाले पेट्रोल पंप करोड़ो का मुनाफ़ा कमा रहे थे पर प्रतिदिन 100 रुपये कमाने वाला गरीब अपना दसवाँ हिस्सा पेट्रोल पम्प में मुफ्त में लुटा कर आता था.. यकीनन STF को पूर्ववर्ती सरकारों में भी कुछ ना कुछ सुराग मिले रहे होंगे पर ना जाने उसने कोई एक्शन क्यो नहीं लिया था ।।

सत्ता बदलते ही जब हर विभाग में नियम और कानून का पालन करने की बात शुरू हुई तो उसमें  पेट्रोल पम्प भी आये .. STF ने सराहनीय काम करते हुए वो चोरी पकड़ी जो शायद वर्षों से होती आ रही थी .. जनता ने इस कार्य की प्रशंसा की और आशा करने लगे कि शायद अब पेट्रोल पम्पो पर उनकी जेब पर डाका ना पड़े ..

पर अब जो हुआ वो अप्रत्याशित था .. पेट्रोल पंप मालिक खुद पर हुई कार्यवाही पर आत्ममंथन और सुधार के बजाय कार्यवाही के ख़िलाफ़ यूनियन बना कर हड़ताल पर चले गए. वो पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना चाह रहे थे पर कुछ व्यस्ततावश जब मुख्यमंत्री मिल नही पाए तो उन्होंने हड़ताल घोषित कर दी ..

पेट्रोल पम्प मालिकों के हड़ताल के पीछे के तर्क भी अजीब हैं . उनका कहना है कि उनके यहां कोई कर्मचारी STF और पुलिस के डर से काम ही नहीं करना चाह रहा है ..

सवाल उठता है कि क्या वो अपने पेट्रोल पंप को हर जांच, नियम , कानून या औचक निरीक्षण से मुक्त रखना चाहते हैं ??

क्या वो चाह रहे कि उनके कार्यों को नजरअंदाज किया जाय ?

और अंत मे –

क्या वो विगत समय मे चिप लगा कर जनता से लूटे गए अतिरिक्त पैसे वापस करने को तैयार हैं??

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