काशी मुक्ति की भी सुगबुगाहट शुरू. हाईकोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर आमने सामने


अयोध्या प्रकरण में 1992 के समय हुजूम में जा रहे कारसेवकों के मुँह से कसार एक नारा सुनाई देता था कि- अभी तो पहली झांकी हैं , मथुरा काशी बाकी है . ये वो नारा था जो मथुरा और काशी में हिन्दू तीर्थों पर बनी मस्जिद की तरफ इशारा कर रहा था जिसे हिन्दू कानूनी लड़ाई आदि के माध्यम से वापस पाने का संकल्प दोहराता था पर समय के साथ ये नारा कहीं खो गया था जिसके काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद के आमने सामने आने से एक बार फिर से पुनर्जीवन मिलने की संभावना जताई जा रही है .

श्रीराम लाला अयोध्या का मामला सुप्रीम कोर्ट में अंतिम चरण में है . इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट बुधवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है जिसमे वो निचली अदालत के एक फैसले को चुनौती देगा . 1998 में वाराणसी की जिला अदालत ने एक आदेश जारी कर के प्रार्थना आदि के लिए जमीन निर्धारित करने का आदेश दिया था जो सुन्नी वक्फ बोर्ड को स्वीकार नहीं है और वो उस फैसले की दुहाई दे रहा है जो पराधीन भारत में 1942 में आया था . 


कांग्रेस की नरसिंहाराव सरकार ने 1991 में आदेश जारी किया था कि श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या को छोड़ कर बाकी सारे धर्मस्थलों की यथा स्थिति 1947 के अनुसार बहाल राखी जाय जिसके विरोध में कशी विश्वनाथ मंदिर मुक्ति संघर्ष समिति ,प्राचीन मंदिर व् ज्ञानवापी वाराणसी निचली अदालत चले गए थे जिसमे अंजुमन इंतजामिया मस्जिद को प्रतिवादी बनाया गया था . बाद में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इसमें प्रतिवादी बनने का आवेदन किया था जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था .


हिन्दू पक्ष के अनुसार बाबर की ही तर्ज पर उसी के वंशज औरंगजेब ने काशी में भी अपनी क्रूर कट्टर मजहबी छवि के चलते कशी विश्वनाथ में महादेव शिव का मंदिर ध्वस्त कर दिया था . हिन्दू पक्षकारों का कहना है कि उस स्थान पर आज भी शिवलिंग विराजमान है और आस पास की जमीन पर काशी विश्वनाथ मदिर प्रशासन का कब्ज़ा है जिसकी हिन्दू अभी भी परिक्रमा करता है . हिन्दुओं का दावा है कि औरंगजेब ने हमारे मंदिर के ही टूटे अवशेषों से ही वहाँ कि मस्जिद का निर्माण करवाया गया है . हिन्दुओं का ये भी दावा है कि मंदिर ध्वंस के अवशेष अभी भी बनवाई गयी मस्जिद के पास पड़े हैं . बाद में प्रशासन ने मुसलमानो के दबाव में उस स्थान पर नमाज़ पढ़ने की अनुमति दे दी . हिन्दुओं की मांग ये भी है कि उस स्थान पर मुस्लिमो का प्रवेश निषेध किया जाय . 


जबकि मुसलमान हास्यास्पद बयान देते हुए कहते हैं कि उस स्थान पर कोई मंदिर कभी नहीं था . अयोध्या में मंदिर नहीं , मथुरा में मंदिर नहीं और काशी में मंदिर नहीं .. ये बयान अजीब और शायद कभी भी विश्वास ना करने योग्य है . बुधवार को ये बड़ा मुकदमा एक बार फिर खोला जा रहा है जिसे खुलवाने का कार्य मुस्लिम पक्ष ने ही किया है . 


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