IG सतीश गणेश ने SP अनीस अहमद से फरियादी बन चेकिंग हेतु फोन किया तो कुछ यूँ पेश आये अनीस अहमद

पुलिस का नाम आते ही कड़क और रौबदार छवि सामने आ जाती है . अक्सर इसी कड़क छवि के चलते कुछ लोग जो पीड़ित भी हैं वो अपनी तकलीफ पहुंचाने में भी संकोच करते हैं पुलिस तक , ये सोच कर की ना जाने उनके साथ कैसा वर्ताव हो. पर हर पुलिस वाले एक जैसे नहीं होते . कुछ पुलिस वाले रायबरेली , लखनऊ और अम्बेडकर नगर के पुलिस अधीक्षक जैसे होते हैं पर कुछ अमेठी के एस पी अनीस अहमद अंसारी जैसे भी होते हैं जो अपनी वर्दी को ही अपने रौब का जरिया बना लेते हैं और फिर जनता के अंदर एक संदेश जाता है कि पुलिस से दूर रहना चाहिए क्योकि वो बहुत कड़क होते हैं . 

मामला था लखनऊ से एक रूटीन चेक का . योगी राज में हर पुलिस वालों को सौम्यता , मृदुता से फरियादी से पेश आने का आदेश जारी हुआ है . सरकार के इस आदेश का कितना अनुपालन हो रहा है इसे चेक करने के लिए उच्चाधिकारियों को बराबर निर्देश जा रहे है जिसका अनुपालन उच्चाधिकारी कर भी रहे हैं . इसी क्रम में IG जोन श्री ए सतीश गणेश जी ने अपने अधीनस्थ क्षेत्र में 9 पुलिस अधीक्षकों को अनजान नंबर से एक एक कर के फोन मिलाया जिसमे कुछ ने बेहद बेहतर तरीके से प्रतिउत्तर दिया तो कुछ ने अपना पल्ला झाड़ा .. पर इन सब में सबसे बुरा उत्तर उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में तैनात SP अनीस अहमद अंसारी का रहा .


IG के प्रयोग में रायबरेली , अम्बेडकर नगर और लखनऊ के पुलिस अधीक्षक अपेक्षाओं पर खरे उतरे जिन्होंने फरियादी रूप में बोल रहे IG की हर बात पूरी सुनी और हर सम्भव मदद का आश्वाशन दिया. फिर उन्नाव की SP का फोन ही नहीं उठा , लखीमपुर के SP ने पेड़ कटाई को कहा कि ये मेरा विभाग नहीं वन विभाग को सम्पर्क करो . हरदोई के SP ने फोन अपने पेशकार को थमा दिया . 


इन सब में सबसे बुरा जवाब अमेठी के पुलिस अधीक्षक अनीस अहमद अंसारी का रहा है. उन्होंने फोन पर अपना पुलिसिया रौब झाड़ते हुए बेहद कड़े शब्दों में बात की. उन्होंने फरियादी रुपी IG को यहाँ तक कह दिया कि ” तुम गंवार हो क्या , पढ़ाई लिखाई नहीं किये हो क्या ?’ .


IG ने कहा कि रूटीन चेक आगे भी होते रहेंगे . इस चेकिंग में जो सही पाए गए उन्हें प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा और सम्मानित किया जाएगा . अनीस अहमद जैसे पुलिसिया धौंस दिखाने वाले पुलिस अधीक्षकों को स्पष्टीकरण देना होगा जो उच्चाधिकारियों को संतोषजनक लगे . 

एक पुलिस अधिकारी यदि जनता से इस प्रकार का व्यवहार करता है तो निश्चित रुप से उसके यहाँ न्याय की आशा धूमिल हो जाती है . बहुसंख्यक जनता ऐसे रॉब झाड़ने वाले पुलिस अधीक्षक के पास जाने से भी कतराएगी.

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