जिन दो पुलिस वालों ने कभी पकड़ा था कसाब को, आखिर वो इतने कैसे बदल गये ?

मुंबई पुलिस के जिन जवानों ने 26/11 के दौरान इस्लामिक आतंकी अजमल कसाब को पकड़ा था, उनमें अब इतना बदलाव आ गया है कि उनको सजा सुनाई गई है. एकसमय था जब अजमल कसाब को ज़िंदा पकड़ने के कारण उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, आज वो सजा के पात्र बन चुके हैं. बता दें कि मुंबई में हुए 26/11 हमले के आतंकियों में से एक अजमल कसाब को जिंदा पकड़ने वाले पुलिस अधिकारियों में से एक संजय गोविलकर को मुबई पुलिस आयुक्त ने निलंबित कर दिया गया है.

संजय गोविलकर के अलावा एक और पुलिस अधिकारी जितेंद्र सिंगोट को भी संस्पेंड किया गया है. मुंबई पुलिस के इन दोनों अधिकारियों को डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गे सोहैल भामला को छोड़ने के आरोप में निलंबित किया गया है. बता दें कि सोहेल के खिलाफ लुक ऑउट नोटिस जारी किया गया था और उसे मुंबई के एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था. सोहेल दुबई से मुंबई पहुंचा था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन दो अधिकारियों का निलंबन किया गया है उनकी तैनाती मुंबई पुलिस के ईओडब्ल्यू में थी. इन्होंने एयरपोर्ट पर भामला को पकड़ा और फिर दफ्तर ले गए.

यहाँ इन्होने भामला के साथ पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया जिसके बाद सोहैल फिर से भागने में कामयाब हो गया. इसके बाद काम में लापरवाही बरतने के सूचना मिलने के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे ने दोनों को निलंबित कर दिया है. बता दें कि सोहैल का नाम कई साल से मुंबई पुलिस की वाटेड लिस्ट में शामिल है. इसी वजह से उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया है. मुंबई में नकली करेंसी चालने के आरोप में कोर्ट ने भामला को साल 2004 में पांच साल की जेल की सजा सुनाई थी. लेकिन अंतरिम बेल मिलने के बाद भामला फरार हो गया था जिसके बाद उसे भगौड़ा घोषित कर दिया गया था.

इसके अलावा एक बिजनेसमैन ने जुहू में एक बंगला को लेकर भामला के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था. भामला को भगौड़ा घोषित करने के बाद मुंबई पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया था. लेकिन इसी बीच पिछले सप्ताह वो दुबई से मुंबई पहुंचा था. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने उसको हिरासत में लेकर ईओडब्ल्यू को सूचना दी थी. इसके बाद EOW में कार्यरत दोनों अफसरों ने पुराने एक मामले में पकड़ा और दफ्तर ले गए, लेकिन पूछताछ के बाद छोड़ दिया. इसी के बाद से सोहेल भाग निकला. काम में लापरवाही को लेकर पुलिस आयुक्त संजय बर्वे ने दोनों को निलंबित कर दिया है और जांच के आदेश दिए हैं.

26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले के समय पीआई संजय गोविलकर शहीद पुलिस कॉन्स्टेबल तुकाराम ओम्बले के साथ गिरगांव चौपाटी पर तैनात थे. ओम्बले ने साथी आतंकी के साथ आ रहे कसाब की गाड़ी रोक ली. इस दौरान धरपकड़ की कोशिश में ओम्बले शहीद हो गए. वहीं गोविलकर ने एक आतंकी को गोली मार दी और कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया. गोविलकर को मुंबई आतंकी हमले के दौरान दिखाए गए बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पुलिस पुरस्कार भी मिल चुका है

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