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अपराधियों के बजाए साधारण लोगों को धमका रहा कांग्रेस शासित कर्नाटक प्रशासन. परेश के कत्ल को आत्महत्या बताने पर आमादा

पुलिस के जांच के पहले ही मजहबी उन्मादी जज बनने लगते है. जज ऐसा बनते है कि पहले तो कत्लेआम मचाते है और फिर खुद ही फैसला दे देते है कि ये हरकत उनकी नहीं है. ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले परेश मेस्ता नाम के शख्स की लाश झील में मिली थी. ज्सिके बाद कर्नाटक में लोग इकट्ठा हो गए, सभाएं की और माहौल तनावपूर्ण हो गया. आपको बता दे कि कर्नाटक के जिला उत्तरी कन्नड़ में पिछले 10 दिनों में सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएं देखी गई .

इसकी शुरुआत 1 दिसंबर से हुई थी, जब कुछ लोग मोहम्मद साहब कि अवैध समाधि बनाने की कोशिश कर रहे थे जिसपर हिन्दू धर्म के लोगों में रोष था, वो नहीं बनने देना चाहते थे अवैध कुछ भी, ये बात कट्टर मजहबियों को बुरी लगी और वो उन्माद पर उतारू हो गए.थोड़ा हंगामा हुआ, एक दूसरे का विरोध हुआ और स्थिति शांत होने लगी.

6 दिसंबर की शाम को एक बाइक और ऑटो रिक्शा की टक्कर हो गई. जिसमे फिर से कट्टर मजहबी ने अपने साथ वालों को बुलाकर उस व्यक्ति को पिट दिया जिसके बाद सांप्रदायिक आग भड़क गई. दोनों ही पक्षों के लोग आमने सामने आ गए.

पुलिस भी पहुंची और उसने एक पक्ष के 28 और दूसरे पक्ष के 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इसी हंगामे के दौरान एक पक्ष का एक शख्स परेश मेस्ता गायब हो गया. 8 दिसंबर को शनि मंदिर के पास शेट्टी झील में उसकी लाश मिली. जिसे मजहबियों ने मार कर फेक दिया. परेश की हत्या में पुलिस में एक मुकदमा दर्ज करवाया गया. इसमें आरोप था कि जब 6 तारीख को हिंसा हुई थी तो पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार करने के बाद शांति कायम कर दी थी. हिंसा में परेश की बाइक टूट गई थी. जब वो उसे लेने के लिए गया तो उसकी हत्या कर दी गई. परेश की हत्या में पांच लोगों इम्तियाज, आजाद, आमिर, सलीम और आसिफ के खिलाफ 8 दिसंबर को हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज करवाया गया.

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