दिन प्रतिदिन बिगड़ रही जनसँख्या नियंत्रण कानून की मांग पर अनशनरत सन्त यति नरसिंहानंद सरस्वती जी की तबियत. साथ ही हिन्दू समाज में फैल रहा जनाक्रोश

हिंदुओं की रक्षा का अंतिम विकल्प जनसँख्या नियंत्रण कानून को बता कर उसके तार्किक आंकड़ो के साथ जल्द से जल्द चीन की तर्ज पर इसको लागू करवाने के उद्देश्य से सरकार से मांग हेतु अनशन पर बैठे ओजस्वी सन्त यति नरसिंहानंद सरस्वती जी महाराज के अनशन को 11 दिन बीत गए हैं लेकिन इसके बाद भी अभी तक शासन व प्रशासन द्वारा किसी भी स्तर पर उनकी सुध न लेने के बाद उनके समर्थकों में आक्रोश फैलता जा रहा है और उनका कहना है कि सन्त यति नरसिंहानंद के साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी का जिम्मेदार इस क़ानूम के विरोधियों को ठहराया जाएगा व इसका उचित प्रतिउत्तर भी दिया जाएगा …

मां काली के सिद्ध पीठ गाजियाबाद में पड़ने वाले डासना देवी मंदिर के महंत व अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानंद सरस्वति जी महाराज  का जनसँख्या नियन्त्रण कानून को लेकर आज आमरण अनसन का ग्यारहवा दिन है ,आज अचानक दोपहर के बाद उनकी तबियत बिगडती नजर आ रही है |लेकिन शाशन  व प्रशासन  के किसी के कानों पर जूं तक न रेंगने के चलते न सिर्फ उनके समर्थक अपितु उनकी उग्र हिंदुत्व की छवि के चलते तमाम हिन्दू संगठनों में आक्रोश फैलता जा रहा है जो आगे चल कर कोई अन्य रूप भी ले सकता है जिसका यकीनन उत्तरदायित्व उदासीनता व अनदेखी ही माना जायेगा ..

खुद महंत यति नरसिंहानंद जी का मानना है कि वो देश के लिए सबसे जरूरी कानून की मांग पर बैठे हैं और ये संवैधानिक मांग किसी भी प्रकार से गलत नहीं है .. उनके समर्थकों का भी कहना है कि महंत जी की मांग धर्म व देश के हित में सबसे कारगर सिद्ध होने वाली मांग है |स्वामी जी के अनसन को देश के सभी हिन्दू वादी  संगठन पूर्ण समर्थन कर रहे है |कल सहारनपुर ,नागपुर ,रुध्रपुर आदि जगाहो पर प्रदर्शन किया गया व प्रशासन को ज्ञापन शोपे | कल भी कई जगाहो पर प्रशसन को ज्ञापन दिया जायगा व प्रदर्शन आदि होंगे.. कुल मिला कर ये आक्रोश अब गाजियाबाद जिले से निकल कर प्रादेशिक स्तर पर आ रहा जो आगे चल कर शाशकीय उपेक्षा के चलते राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप भी ले सकता है ..यहां ध्यान देने योग्य है कि महंत यति नरसिंहानंद जी पहले से ही तमाम बीमारियों से जूझ रहे हैं और इतने लंबे अनशन के चलते उनके शारीरिक हालात बद से बदतर होते जा रहे जो कभी भी घातक स्थिति में पहुँच सकते हैं ..

दिन बीतने के साथ ही दिन प्रतिदिन जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ  सरकार से जनता का विशवास उठता जा रहा है |पिछले दिनों गंगा सफाई को लेकर एक संत ज्ञानस्वरूपा सानंद  जी आमरण अनशन पर बैठे थे जिसका सरकार पर कोई असर नहीं हुआ और वो संत  111 दिन के अनसन में अपने प्राण गवा बैठे थे जिसमें केंद्र सरकार तक की काफी किरकिरी हुई थी ..एक बार फिर से लगभग वही हालात फिर से बनते दिख रहे हैं जिस पर अभी किसी उच्चाधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है जो आगे चल कर न सिर्फ जिला प्रशासन अपितु प्रदेश व केंद्र सरकार की किरकिरी की एक बड़ी वजह बन सकता है …

Share This Post