बधाई दें जालौन की गुलफ्सा अंसारी को जिन्होंने 7 जन्मों का साथी चुना है मोनू शर्मा को… दोनों परिवार भी हुए राजी

परिवार भी खिलाफ था और समाज भी खिलाफ था लेकिन गुलफ्सा ने संकल्प ले लिया था कि वह सिर्फ और सिर्फ मोनू शर्मा की अर्धांगिनी बनकर ही रहेगी. अंत में तमाम अवरोध तथा बंदिशें गुलफ्सा तथा मोनू के प्यार के आगे टूट गईं तथा दोनों के परिजन भी मान गये और अब गुलफ्सा की शादी मोनू के साथ हो चुकी है. मामला उत्तर प्रदेश के जालौन जिले का है जहाँ के ब्राह्मण समाज के मोनू तथा मुस्लिम समुदाय की गुलफ्सा ने जन्म-जन्मान्तर तक एक दूसरे का साथ देने की कसमें खायीं. यह विवाह इसलिए भी ख़ास है क्योंकि दोनों परिवारों ने विवाह के लिए रजामंदी देकर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में रस्में सम्पन्न कराई हैं. विवाह में वर और वधू पक्ष के सैकड़ों लोगों ने जोड़े को अपना आशीर्वाद दिया है.

बता दें कि जालौन जिले के उरई निवासी मोनू शर्मा का मोहल्ले की ही युवती गुलफ्सा अंसारी से प्रेम-प्रसंग चल रहा था. जब दोनों के परिजनों को उनके प्रेम-प्रसंग के बारे में पता चला तो उन्हें यह नागवार गुजरा. दोनों के परिजनों ने उन्हें धर्म और जाति का हवाला देकर समझाने का प्रयास किया, लेकिन साथ जीने-मरने की कसमें खा चुका यह प्रेमी युगल अपने संकल्प से पीछे नहीं हटा. अंत में दोनों के परिजन उनके विवाह के लिए राजी हो गए. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में विवाह के लिए आवेदन किया गया, जिसके बाद रविवार को उरई के एक महाविद्यालय में आयोजित सामूहिक विवाह में दोनों का विवाह रीति-रिवाज के साथ सम्पन्न कराया गया.

सामूहिक विवाह में 45 जोड़ों का विवाह सम्पन्न कराया गया, जिसमें यह जोड़ा लोगों की चर्चा का विषय रहा. इस नवविवाहित जोड़े को हर कोई अपना आशीर्वाद देने के लिए आगे बढ़ रहा था. इस पूरे मामले पर मोनू के बड़े भाई का कहना है कि उन्हें अपने भाई पर गर्व है कि उसने एक ब्राह्मण परिवार से होते हुए भी धर्म-जाति से ऊपर उठकर मुस्लिम युवती से शादी की. ब्राह्मण अब जाति, धर्म नहीं मानते हैं. हमारे परिवार ने सामुदायिक सद्भवाना की एक शानदार मिशल कायम की है. सुदर्शन परिवार मोनू तथा उनकी मोनू को अपना जीवन साथी के रूप में चुनने वाली गुल्फ्सा को नवजीवन की बधाई तथा शुभकामनायें देता है.

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