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मध्य प्रदेश में अराजपत्रित पुलिस वालों पर ये कैसी तानाशाही ? इंस्पेक्टर का 8 माह में 11 बार हुआ ट्रांसफर

अराजपत्रित पुलिस वालों की दिशा और दशा शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहाँ उसको सुधरी और संतोषजनक कही जा सके. आये दिन कई प्रदेशो में कई पुलिस वालों ने आत्महत्या तक कर के इस दिशा में उच्चाधिकारियों के साथ शासन का ध्यान दिलाने की कोशिश की है लेकिन हालात ठीक वही हैं जो सन 1861 में हुआ करते थे . आज भी कई जगहों पर निचले स्तर कर कर्मचारी अंग्रेजी काल के मंगल पाण्डेय की नजर से देखा जाता है और ऊपर का अधिकारी खुद को कर्नल वोघ ..

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सन 1861 एक्ट से अभी भी संचालित पुलिस के अराजपत्रित कर्मियों की प्रताड़ना का सबसे ताजा और सबसे बड़ा उदाहरण देखना है तो मध्य प्रदेश के इंस्पेक्टर सुनील लाटा से मिला जा सकता है . क्या विचार भी कर सकते हैं कि इस इंस्पेक्टर का मात्र 8 महीने में 11 बार ट्रांसफर किया गया है और एक जगह बोरिया बिस्तर बाँधने और खोलने के तत्काल बाद उसका एक नया ट्रांसफर आर्डर आ जाता रहा. आख़िरकार अपने सिस्टम से हैरान हो कर इंस्पेक्टर को अंतिम सहारा हाईकोर्ट ही दिखाई दी है .

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भले ही आधे से ज्यादा ध्यान अन्य प्रदेशो के हालात समझने में लगा रहे हों पर उनके राज्य में समाज के रक्षको की ये दशा किसी को भी व्यथित कर देगी .. मध्य प्रदेश पुलिस के इंस्पेक्टर सुनील लाटा का पहला तबादला बैतूल से आईजी ऑफिस होशंगाबाद हुआ। उसके बाद होशंगाबाद से पुलिस मुख्यालय में तबादला हो गया। वहां से मुख्यालय के आदिम जाति कल्याण शाखा में तबादला कर दिया गया, फिर वहां से बैतूल के आदिम जाति कल्याण भेजने का आदेश जारी हुआ।

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पुलिस निरीक्षक लाटा के तबादलों का दौर यहीं नहीं थमा। उनका तबादला सागर और छतरपुर के लिए हुआ। वह वहां आमद दर्ज करा पाते कि उससे पहले भोपाल स्थानांतरण का आदेश आ गया। उसके बाद उन्हें भोपाल से बैतूल पदस्थ कर दिया गया। वह कोतवाली के थाना प्रभारी रहे और फिर उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया। उसके बाद सारणी थाने का प्रभारी बनाया गया। सारणी थाने के प्रभारी का पद संभाले सात दिन भी नहीं हुए थे कि अब उनका निवाड़ी जिले के लिए तबादला आदेश आ गया।

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इससे परेशान होकर थानेदार (निरीक्षक) सुनील लाटा ने जबलपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सुनील लाटा ने आईएएनएस को बताया कि लगातार हो रहे तबादलों से परेशान होकर अंतत: 30 अगस्त को जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जहां सुनवाई हो रही है। उन्होंने कहा, ‘आठ माह में 11 तबादले के आदेश जारी हुए हैं। न्यायालय से मांग की है कि इस तरह तबादलों के आदेश जारी किए जाने पर रोक लगाई जाए, क्योंकि इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।’

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