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सुदर्शन चट्टान की तरह खड़ा रहा था मुजफ्फरनगर के हिन्दुओं के साथ.. आखिर में हुआ न्याय और खुशी से झूम उठा उत्तर प्रदेश

वो 2013 का अगस्त का महीना था जब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मजहबी उन्मादियों ने मौत का खूनी खेल खेला था. उन्मादियों ने पहले हिन्दू समुदाय की एक युवती पर कुद्रष्टि डाली तथा जब युवती ने भाइयों सचिन और गौरव ने इसका विरोध किया तो उन्मादियों ने क्रूरतम तरीके से दोनों की ह्त्या कर दी. उन्मादी यहीं नहीं रुके बल्कि इसके बाद शुरू हुआ दंगों का खेल. जी हाँ, सचिन तथा गौरव की ह्त्या के बाद जब हिन्दुओं ने प्रतिकार किया तो उन्मादियों को तुष्टीकरण की प्रतिमूर्ति तत्कालीन सपा सरकार के नेताओं के संरक्षण की भी खबरें सामने आई. इस घटना के बाद न सिर्फ मुजफ्फरनगर बल्कि पूरा उत्तर प्रदेश आक्रोश से भर उठा था तथा मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे. सचिन और गौरव की ह्त्या करने वाले सभी 7 उन्मादियों को न्यायालय ने अब उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही उन पर 2-2 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया है.

अफ़सोस की बात ये थी कि इसके बाद भी तमाम तथाकथित सेक्यूलर राजनेता, बुद्धिजीवी तथा मीडिया हाउस मुजफ्फरनगर के हिन्दुओं को ही दोषी ठहरा रहे थे, उस समय सिर्फ सुदर्शन ही था जो मुजफ्फरनगर के हिन्दुओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा था. लेकिन कहते हैं कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं किया जा सकता. यही हुआ मुजफ्फरनगर दंगों में जब एक लंबे इन्तजार के बाद इस मामले में न्याय हुआ है. मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी 7 उन्मादियों को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुना दी है. न्यायालय के इस फैसले के बाद जहाँ न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर का हिन्दू समाज खुशी से झूम उठा है तो वहीं सुदर्शन भी सत्य साबित हुआ है. हालाँकि इस मामले में जनता को उम्मीद थी कि उन्मादियों को फांसी की सजा सुनाई जायेगी लेकिन न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. बता दें कि इस मामले में 6 फरवरी को न्यायालय ने 7 आरोपियों को दोषी करार दिया था.

आपको बता दें कि उस समय एकतरफ जहाँ उन्मादी हिन्दुओं पर हमले कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ अखिलेश सरकार हिन्दुओं पर ही मुकदमे लगा रही थी. आश्चर्य की बात ये थी हिन्दुओं के इस दमन की सत्य खबर सुदर्शन दिखा रहा था तो तत्कालीन केंद्र सरकार ने सुदर्शन को नोटिस भेजा था. लेकिन सुदर्शन न तो सत्य दिखाने से कभी डिगा है और न ही डरा है. मुजफ्फरनगर मामले की सत्य कवरेज दिखाने से रोकने के लिए सुदर्शन पर दवाब डालने के तमाम प्रयास किये गये लेकिन सुदर्शन डिगा नहीं और आज हम सच साबित हुए है. न्यायालय के इस फैसले के बाद सचिन तथा गौरव की आत्मा को भी शांति मिली होगी.

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