राजनीती की फसल काटने के लिए जांबाज़ अफसर पर झूठे आरोप. CRPF, सेना के बाद अब कम्युनिस्ट पार्टी के निशाने पर पुलिस के जांबाज़

ये सदा से भारत का दुर्भाग्य रहा है की जब कोई अधिकारी सत्य , न्याय और नीति के पथ पर चलता है तब तब उसके खिलाफ कोई ना कोई किसी न किसी बहाने से आ कर खड़ा हो जाता है . राजनीति का चोला हमेशा से ही उन न्यायप्रिय अधिकारीयों के पैरों की जंजीर बन कर सामने आया है जो अपनी वर्दी के साथ अपने कर्तव्य के पालने के लिए हर पल तत्पर रहते हैं .

ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में . यह जिला कुछ ऐसे बाहुबलियों के नाम पर जाना जाता था जिनके नाम के आगे कभी कुछ समय पहले ना कानून था और ना ही कोई नियम . फिर अचानक ही सत्ता और निज़ाम बदला और पुलिस को अपराध नियंत्रण करने की छूट शासन द्वारा मिली . पुलिस अपने रंग में आयी तो धीरे धीरे घोषित अपराधियों के हौसले पस्त हुए पर वो सहन नहीं कर पा रहे थे जो राजनीती के चोले में छिपे थे . उन्होंने पुलिस के नियमों को अपने लिए चुनौती जैसा मान लिया और अपनी खोई जमीन को बचाने के लिए निकल पड़े . 

अचानक ही बंगाल में अपने घोर हिन्दू द्रोही कार्यों के लिए जानी जाने वाले , JNU में भारत विरोधी नारे लगाने वालों के साथ खड़ी होने वाली, झारखंड के नक्सलियों का समर्थन करने वाली पार्टी अर्थात कम्युनिस्ट पार्टी  अचानक ही अपनी उत्तर प्रदेश में समाप्त हो चुकी जमीन को तलाशने निकल पड़ी और इसके लिए उन्होंने निशाने पर लिया गोंडा के धानेपुर के थानेदार श्री मनीष पांडेय जी को . मनीष जी जो अपनी स्वच्छ छवि और न्यायप्रियता के लिए जाने जाते हैं अचानक ही उनके निशाने पर आ गए और उन्होंने एक छोटे से मामले को तूल दे कर बड़ा बनाने की कोशिश की . चुस्त और दुरुस्त कानून व्यवस्था के बाद भी झूठे आरोपों से भरा एक प्रार्थना पत्र उसके कुछ स्थानीय नेताओं ने ADM गोंडा श्री रत्नाकर मिश्रा को सौंपा और कार्यवाही की मांग की ..


इस ज्ञापन में उन्होंने किसी गूंगीदेई को अपने राजनैतिक हथकंडो के लिए इस्तेमाल किया और फिर चल पड़े अपनी रोटी सेंकने ..इंस्पेक्टर श्री मनीष पांडेय जी से बात करने पर पता चला की मामला कब का पूरी तरह से निष्पक्षता के साथ खत्म किया जा चुका पर पर इस बीच में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जिले की शांत और पटरी पर चल रही कानून व्यवस्था को बिना वजह छेड़ने के लिए कुछ तथाकथित नेताओं को आगे किया और जमाल खान जैसे एकतरफा बयान देने वाले नेताओं को सामने ला कर मीडिया में बयान दिए..
इन सभी आरोपों से बिना विचलित हुए श्री मनीष पांडेय जी ” परित्राणाय च साधूना विनाशय च दुष्कृताम ” के सिद्धांतो पर अडिग हो कर अपने कर्तव्य पथ पर कार्य कर रहे हैं.. पर ये घटना उन सभी जांबाज़ अफसरों के पैरों में पड़ी राजनैतिक बेड़ियों को दर्शाती है जो निष्पक्षता के साथ समाज की रक्षा कर रहे हैं … ऐसे मामले योगी सरकार के खिलाफ एक सोची समझी रणनीति के तहत भी आये दिन उठाये जाते हैं जिस से जनता को कम से कम इतना जागरूक होने की तो सख्त जरूरत है कि वो गूंगीदेई जैसे किसी राजनैतिक दल का मोहरा न बने और समाज में शान्ति बनाये रखने में सहयोग दे . 

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