देवभूमि का दानव अज़हर झूलेगा फांसी पर.. कक्षा 9 की बच्ची को बलात्कार के बाद तड़पा कर मार डाला था

ये घटना पूरे देश को सन्तोष देने वाली है..एक बच्ची की आत्मा को भी उस समय शांति मिली होगी जब उसकी मासूमियत को कुचल कर एक वहशी दरिंदे ने उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गयी थी.. ये घटना देवभूमि कहे जाने वाले उस उत्तराखंड की है जिसमें फैल रहे संक्रमण को सुदर्शन न्यूज बार बार उठा रहा है और आने वाले समय के प्रति सजग भी करता जा रहा है ..जी हां, उत्तराखंड की एक अदालत ने एक वहशी दरिंदे को दिखाया है मौत का आईना जिसका नाम अज़हर है ..

त्यूणी क्षेत्र की नौवीं कक्षा की एक छात्रा एक जनवरी 2016 को दोस्तों के साथ घूमने गई थी। शाम तक वह वापस नहीं लौटी तो परिजनों ने राजस्व पुलिस को सूचना दी।बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को अंबड़ी निवासी अजहर खान की मोटरसाइकिल पर जाते देखा है। राजस्व पुलिस ने बात आई गई कर दी। अगले दिन परिजन जब उसे ढूंढते हुए जंगल की ओर गए तो वहां देखा कि बेटी का शव एक पेड़ से लटक रहा था। उसके घुटने जमीन से लग हुए थे और उन पर चोट के निशान थे।

ये घटना प्रदेशिक स्तर आक्रोश का कारण बन गयी लेकिन खुद से रचे धर्मनिरपेक्षता के नकली सिद्धांतो का पालन करते हुए मीडिया के बड़े वर्ग ने इसको नही दिखाया और न ही बुद्धिजीवियों ने इस पर शोर मचाया.. असल मे आरोपी का नाम अज़हर था जिसके चलते न जाने क्यों छाई रही खामोशी .. शव मिलने के करीब आठ दिन बाद 10 जनवरी 2016 को पुलिस ने आरोपी अजहर खान को गिरफ्तार कर लिया।आरोपी अजहर खान ने पुलिस को घटनास्थल भी दिखाया जहां उसने छात्रा से दुष्कर्म कर उसकी हत्या की थी। पुलिस ने वहां से छात्रा के गले की माला भी बरामद की। इसके बाद पुलिस ने अजहर की बाइक और उसकी एक चाबी भी बरामद की। जब डीएनए रिपोर्ट आई तो उसमें वैजाइनल स्वैब से पुष्टि हुई कि दुष्कर्म अजहर खान ने ही किया था।

न्यायालय ने दोषी पर अलग-अलग धाराओं में कुल 90 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से 50 हजार रुपये पीड़िता के परिवार को दिए जाएंगे। इसके साथ ही परिवार को निर्भया फंड से भी 50 हजार रुपये की मदद देने का आदेश जिलाधिकारी को दिया गया है। इसके साथ ही हत्या के दोष में अजहर को मृत्युदंड और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने इस मामले को जघन्य अपराध की श्रेणी में रखकर अधिकतम सजा सुनाई है।सज़ा मिलने के बाद भी देेेवभूमि के उस दानव के चेहरे पर न तो संकोच के भाव थे और न ही किसी  प्रयाशचित की भावना.

 

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