गुस्सा नहीं बल्कि पीड़ा थी मेरठ के दरोगा अजीत के मन की, वापस आ रहे नौकरी पर… पुलिसवालों का भार हो कम क्योंकि वो भी है इंसान

अंडर ट्रेनिंग कैडेट को इतनी कड़ी ट्रेनिंग देते है कि, वे उनका दुःख दर्द भूल जाते है। यहाँ तक की वो उनके स्वास्थ के प्रति लापरवाह हो जाते है, नतीजन बहुत से ट्रेनी को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ जाता है। लोहा भी जंग लग के ख़राब जाता है तो बीमार इंसान कैसे कड़ी ट्रेनिंग कर सकता है। ट्रेनिंग के दौरान बर्बर बर्ताव की बहुत सी घटनाओं का अंडर ट्रेनी अफसर और सिपाही अक्सर जिक्र करते है।

मेरठ में तैनात खैर के अंडर ट्रेनिंग दरोगा अजीत सिंह का कुछ समय पहले स्वास्थ बिगड़ गया था जिसके बाद उन्हें छुट्टी न मिलने के कारण मजबूरन ट्रेनिंग के दौरान ही इस्तीफा देना पड़ा ।

बीमार होने के बाद भी अवकाश न मिलने पर उन्होंने पिछले दिनों मेरठ की एसएसपी को इस्तीफा सौंपकर दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल बनने की इच्छा जताई थी। लेकिन अब उन्होंने माता-पिता के समझाने पर यूपी पुलिस में ही सेवा करने का मन बना लिया है।

माता-पिता के समझाने पर उन्होंने इस्तीफा वापस लेने का निर्णय लिया है। खैर निवासी अजीत मेरठ के रोहटा थाने में अंडर ट्रेनिंग दरोगा के पद पर तैनात हैं।

पिछले दिनों अवकाश न मिलने पर इस्तीफा देने से वह सुर्खियों में आ गए थे। बता दें कि अवकाश न मिलने से सिर्फ अजीत सिंह ही तनाव में नहीं थे बल्कि तमाम पुलिस अफसर व कर्मचारी तनाव में रहते हैं। मगर नौकरी की खातिर कोई आवाज नहीं उठाता है। वहीं अजीत सिंह द्वारा इस्तीफा देने से उनके माता-पिता को गहरा आघात लगा था।

माँ – बाप ने अजीत को कई दिनों तक समझाया कि इस तरह नौकरी न छोड़ें।

माता-पिता के समझाने पर उन्होंन इस्तीफा वापस लेने का फैसला कर लिया है। उन्होंने बताया कि यूपी पुलिस में आज भी उनकी आस्था है लेकिन मजबूरी इस बात की थी कि वह कई दिनों से बीमार थे। शरीर में कमजोरी आ रही थी। ड्यूटी के चलते डाक्टर से दवा तक नहीं ला पा रहे थे।जब शरीर ही स्वस्थ नहीं होगा तो नौकरी कैसे कर पाते। ऐसे हालातों मजबूर होकर इस्तीफा दिया था। 

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