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एक और भाजपा शासित राज्य बन रहा है आंदोलन की पृष्ठभूमि. इस बार असम होगा अगला प्रदेश

मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में किसानों ने आंदोलन कर सरकार से कर्ज माफ़ी की मांग की. लेकिन ये आंदोलन धीरे धीरे हिंसक हो गया महाराष्ट्र में सरकार द्वारा किसानों की कर्ज माफ़ी की मांग पूरी भी कर दी गयी. लेकिन अब मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बाद असम में भी किसानो ने कर्ज माफ़ी की मांग की है. मध्यप्रदेश के किसान आंदोलन की तरह असम की भी स्थिति हो रही है. असम में कई संगठनों ने किसानों की कर्ज माफ़ी की मांग की है. संगठन केएमएसएस के प्रमुख अखिल गोगोई ने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने और उपजाऊ जोन मे होने के बावजूद असम उसी तरह की स्थितियों का सामना कर रहा है कि जिस तरह की स्थितियां दो राज्यों में है. 
सही मूल्य नहीं मिलने के कारण कुछ किसानों ने अपनी फसलों को फेंक दिया. ऐसा साफ़ साफ़ प्रतीत हो रहा है कि जल्द ही किसान आंदोलन पर बैठ जायेगे. केएमएसएस और हजारों किसानों ने बारपेटा में बीज डीलर्स के खिलाफ प्रदर्शन किया था क्योंकि किसानों को कम गुणवत्ता कधान के बीज दिए गए थे. इस कारण इस साल बीज रहित चावल का उत्पादन हुआ. लेकिन सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं हुई जिसके कारण भविष्य में किसान सड़कों पर उतर सकते हैं.    
बकौल गोगोई, बारपेटा और सोनितपुर के सब्जी उत्पादक लगातार शिकायत कर रहे हैं कि उनको भारी नुकसान हुआ है. छोटे चाय उत्पादकों को, जो सालाना 600 मिलियन टन चाय का उत्पादन करते हैं जो राज्य के चाय उत्पादन का 35 फीसदी है, 8 रुपए प्रति किलो से कम मिल रहे हैं. यहां स्थिति बहुत खराब है. नोटबंदी के कारण किसान पर्याप्त निवेश नहीं कर सके. ग्रामीण् अर्थव्यवस्था कैश ट्रांजेक्शन पर आधारित है. 
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