मॉब लिंचिंग के जिस मामले में कांग्रेस ने संसद में मचाया था कोहराम, झारखंड के उसी केस में 8 गौ रक्षको को अंतिम सांस तक जेल की सज़ा


ये वही समय था जब कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खड़के के नेतृत्व में मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल कर दिया था.. उस समय हर विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी थी और इन्ही नेताओं के चलते देश को मिला था एक नया शब्द जानने व सुनने के लिए और वो था “मॉब लिंचिंग” .. अफसोस की बात ये रही कि ये मॉब लिंचिंग मोपला नरसंहार, नोवाखाली नरसंहार, कश्मीरी हिन्दू नरसंहार आदि के समय नहीं बताई गई..मुम्बई आज़ाद मैदान में हजारों का उत्पात भी मॉब लिंचिंग नही बोला गया पर निशाना साधा गया गौ रक्षको पर और अब दिखने लगा उस हो हल्ले का जमीनी असर भी .. झारखंड में आखिरकार 8 गौ रक्षको को मिली है अंतिम सांस तक जेल में रहने की सज़ा उसी नए शब्द मॉब लिंचिंग केस के चलते ..

झारखंड की लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र अंतर्गत 2016 में हुई मॉब लिंचिंग की घटना के मामले में  कोर्ट ने सभी  सभी 8 दोषियों को ताउम्र कैद की सजा सुनाई है. साथ ही सभी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना जमा नहीं कराने की स्थिति में सजा एक साल के लिए बढ़ जाएगी. सजा पाने वालों में बालूमाथ के निवासी अरुण साव, प्रमोद साव, शाहदेव सोनी, मिथिलेश साहू, अवधेश साव, मनोज साहू, मनोज कुमार साव व विशाल तिवारी शामिल हैं.

बालूमाथ थानाक्षेत्र के झाबर गांव में 17 मार्च 2016 को दो कथित पशु तस्करों की हत्या कर उनके शव को पेड़ से लटका दिया गया था. मृतक हेरहंज थाना क्षेत्र के नवादा गांव के रहने वाले मजलूम अंसारी (35 वर्ष) और छोटू उर्फ इम्तियाज (18 वर्ष) थे. दूसरे दिन घटना सामने आने के बाद जमकर बवाल मचा था. इस मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था. जिन्हें कोर्ट ने इस कांड का दोषी माना. जिसके बाद बुधवार को सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया.

2016 में जब यह घटना घटी थी तो इसकी गूंज संसद में भी सुनाई पड़ी थी. जिसके बाद पुलिस ने त्वरीत कार्रवाई करते हुए 18 मार्च को ही 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. जबकि तीन आरोपी ने बाद में 22 मार्च को सरेंडर किया था. आरोपितों में बालूमाथ थाना क्षेत्र के निवासी प्रमोद साव, शाहदेव सोनी, मिथलेश साहू, अवधेश साव, मनोज साव, मनोज कुमार साव व विशाल तिवारी शामिल है।


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