चंदौली के बाद गोधरा में भी हुआ श्रीराम के विरोधियों का पर्दाफ़ाश.. एक ऐसी साजिश जिसमें निशाने पर है हिन्दू समाज

गुजरात के गोधरा में श्रीराम विरोधियों ने वही करने की कोशिश की जो उन्होंने उत्तर प्रदेश के चंदौली में किया था. इनका लक्ष्य था कि इस आपसी झगड़े की आड़ में जयश्रीराम के पावन उद्घोष को कलंकित करना है लेकिन गुजरात पुलिस की तीखी नजरों ने ऐसा नहीं होने दिया. आपको बता दें कि गुजरात के गोधरा मुस्लिम समुदाय के तीन युवकों ने आरोप लगाया था कुछ लोगों ने उनसे जबरन जयश्रीराम बोलने का दवाब बनाया तथा जयश्रीराम न बोलने पर उनकी पिटाई की. जाँच के बाद पुलिस ने इस आरोप को झूठा बताया है.

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प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक़, शहर के मोहम्मदी मुहल्ला के रहने वाले 40 वर्षीय मोटर मैकेनिक सिद्दिकी अब्दुल सलाम ने 1 अगस्त देर रात गोधरा ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसमें उसने आरोप लगाया था कि बाबा नी माधी इलाके के पास उसके बेटे समीर और उसके दो दोस्तों सलमान और सोहेल की 20 से 30 साल के 6 लड़कों ने जय श्री राम न बोलने पर पिटाई कर दी. सिद्दिकी ने शिकायत में कहा था कि कल रात तकरीबन 10 बजे उसका बेटा अपने दोस्त के साथ बाजार गया था. इसी दौरान दो बाइक पर सवार 6 लोगों ने उन्हें रोका और जय श्री राम बोलने को मजबूर किया. मना करने पर उनलोगों ने मारपीट की.

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सिद्दीकी ने आरोप लगाया था कि स्थानीय लोगों के जमा होते ही हमलावर भाग गए. सिद्दिकी ने कहा था कि घटना हिंदू बहुल इलाके में हुई, जो उसके घर से करीब एक किलोमीटर दूर है. जयश्रीराम न बोलने के कारण पिटाई की खबर मिलते ही पुलिस तत्काल जांच में जुट गई. पुलिस ने मामले की जांच की तो हैरान करने वाला मामला सामने आया. पुलिस जांच में सिद्दीकी के वो सभी आरोप झूठे निकले जिसमें उसने कहा था कि जयश्रीराम न बोलने पर उसकी व उसके साथियों की पिटाई की गई थी.

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एसपी लीना पाटिल शिकायतकर्ता सिद्दीकी के आरोपों को झूठा बताया है. लीना पाटिल ने कहा कि शुरुआती जाँच से ये बात सामने आई है कि झगड़ा किसी धार्मिक नारे को लेकर नहीं हुआ. सीसीटीवी फुटेज से साफ़ है कि बाइक साइड से चलाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस हुई थी, जयश्रीराम या अन्य किसी धार्मिक नारे को लेकर नहीं. बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर, उन्नाव, चंदौली, हरियाणा के गुरुग्राम तथा महाराष्ट्र के शंभाजीनगर(औरंगाबाद) से ऐसी ए शिकायतें दर्ज कराई थीं जो बाद में गलत निकलीं.

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