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किसी महापुरुष के नहीं बल्कि एक दुर्दांत आतंकी के कारण 10 दिन बंद रहेंगे कश्मीर के स्कूल. ये है वहां के शिक्षा के हाल….

कश्मीर में आतंकियों का महिमामंडन करना कोई नई बात नहीं है। जिनके हाथ सैकड़ों के खूनों से रंगे हो उन्हें वहां शाहिद का दर्जा देकर पूजा जाता है। आंतिकयों को अपना आका मान कर भारतीय जवानों पर आये दिन हमले होते हैं। जो जवान अपनी हालत और हालातों के फिक्र किये बिना इनकी सुरक्षा के लिए खड़े रहते है। गौरतबल है कि पिछले साल 8 जुलाई को ही घाटी में सेना ने बुरहान वानी को ढेर कर आतंकवाद के चेहरे का खात्मा किया था। बुरहान की याद में कुछ खास मजहब के लोगों ने इस दिन को ‘बुरहान वानी दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान किया था।  
ये रैली बर्मिंघम में होनी थी, जिसके लिए बाकायदा पोस्टर भी तैयार किए गए थे और बर्मिघम प्रशासन से बकायदा परमिशन भी ली थी, पर भारत सरकार के कड़े शिकायत के बाद बर्मिघम प्रशासन ने परमिशन वापिस ले लिया। भारत ने ब्रिटेन में बुरहान वानी दिवस मनाने की ख़बर पर कड़ा ऐतराज जताया। भारत ने कड़े रुख में सवाल करते हुये पूछा कि क्या ब्रिटेन सरकार अपनी धरती पर आतंकियों का महिमामंडन की इजाजत कैसे दे सकती है? भारत के कड़े विरोध के बाद बर्मिंघम सिटी काउंसिल ने समन वापिस लेते हुए बुधवार को रैली आयोजकों को दी गई इजाजत वापस ले ली। 
बताते चले कि बुरहान की मौत के बाद घाटी लगातार जल रही है। आये दिन वहां पत्थरबाजी और पाकिस्तान समर्थकों की भीड़ जवानों पर हमला करते हुए नज़र आती है। पुलवामा, कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग जिले बुरी तरह हिंसा की चपेट में है। जलती अशांति के बीच इन इलाकों में पिछले पांच महीनों में 76 लोगों मारे जा चुके है, जिनमें दो पुलिसकर्मीयो की भी मौत हुई हैं। वहीं करीब 80 युवको के आतंकियों के साथ जुड़ जाने की सम्भावना है। इन्ही दिक्कतों को मद्देनज़र रखते हुये घाटी में शांति बनाये रखने के लिए स्कूलों में छुट्टी का ऐलान किया गया हैं। बुरहान की बरसी पर घाटी में बुरहान समर्थक के हिंसा भड़काने की आशंका के मद्देनजर स्कूलों में 6 जुलाई से 10 दिनों की छुट्टी का ऐलान किया गया। 
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