तीन तलाक की गाज गिरी समाजवादी पार्टी के बड़े नेता पर.. होश लगे ठिकाने


अखिलेश यादव कोई मौका नहीं छोड़ते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बेबुनियाद इलज़ाम लगाने का. यहाँ तक की वह यूपी की जनता को साबित करने में लगे

रहते हैं कि उनके राज में यूपी की हालात बेहतर थे. लेकिन यह घटना अखिलेश के सभी दावों को सिरे से ख़ारिज करते है. खास मज़हब के साथ खास लगाव

रखने वाले सपा राष्ट्र अध्यक्ष अखिलेश यादव नहीं बचा पाए महिला को तीन तलाक की पीड़ा से.

जबकि उस पीड़ित महिला को पीड़ा देने वाली और कोई नहीं एक सपा महिला विधायक है जिसके भाई ने अपनी बेगम को दे तीन तलाक दिया जिसका साथ उस

महिला सपा विधायक ने दिया. दरअसल, कानपुर के स्वरूप नगर थाने में मंगलवार शाम सपा की पूर्व विधायक गजाला लारी समेत पांच लोगों के खिलाफ दहेज

की मांग पूरी न कर पाने पर तलाक देने और प्रताड़ित करने की रिपोर्ट सोफिया अहमद ने दर्ज कराई है.

चेन्नई निवासी सोफिया अहमद का निकाह 12 जून 2015 को सपा की पूर्व विधायक गजाला लारी और कारोबारी शारिक अराफात के साथ हुआ था.

उस समय

गजाला लारी देवरिया के रामपुर कारखाना से सपा विधायक थीं. सोफिया ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी ननद गजाला लारी और उसका बेटा मंजर लारी भी

उसे प्रताड़ित करता था. उसने पुलिस से शिकायत की लेकिन सत्ता के दबाव के चलते पुलिस किसी भी तरह की सुनवाई करने के लिए तैयार नहीं हुए.

तीन तलाक सदियों से चली आ रही एक इस्लामिक प्रथा हैं जिससे कई महिलाये पीड़ित हैं. सपा शाशन काल में भी ऐसे कई मामले हुए जिसमे से एक तो उन्ही

की पार्टी विधायक के घर में हुआ लेकिन अखिलेश सरकार ने एक बार भी इसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई। और अब भी वह तीन तलाक जैसे गंभीर मुद्दे पर बात

करने की बजाय यह गिनवाते हैं की उनके साशनकाल में उन्होंने थानों को जन्माष्टमी मनाने के लिए कितने पैसे दिए.   


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