मेरठ के कई छात्रों का भविष्य खतरे में : समाज कल्याण ने प्रस्तावित नहीं किया कई छात्रों का छात्रवृत्ति का डेटा

मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के कई छात्रों का भविष्य खतरे में है। मेरठ के समाज कल्याण कार्यालय की लापरवाही से कई छात्र-छात्रों का छात्रवृत्ति एंव फीस प्रतिपूर्ती का डेटा शासन तक नहीं पहुंच पाया हैं। जिस कारण मेरठ के कई छात्र-छात्रों की छात्रवृत्ति नहीं आ पाई हैं। छात्र समाज कल्याण के चक्कर काट रहे हैं मगर कोई जवाब देने को तैयार नहीं है। कई छात्र एकत्रित होकर समाज कल्याण के दफ्तर पहुंचे। शासन को डेटा भेजने के लिए समाज कल्याण से 15 अप्रैल तक का समय दिया गया था, मगर 15 अप्रैल तक किसी भी तरह की कार्यवाही नहीं हो पाई हैं। 

छात्र अब भी समाज कल्याण के चक्कर लगा रहे हैं। दिन पे दिन छात्रों की समस्या बढ़ती जा रही है। कई छात्र ऐसे हैं जो छात्र फीस प्रतिपूर्ती के ऊपर है, और छात्रवृत्ति ना आने से उन छात्रों को अपना प्रवेश रद्द करवाना होगा। अब छात्र निराश होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगा रहे कि वो इस मुद्दे पर अपने स्तर की कार्यवाही करें। छात्र अलग-अलग तरिके से मुख्यमंत्री से अपनी गुहार लगा रहे है। 

कई छात्र फेसबुक के जरिए, तो कई छात्र ट्विटर के द्वारा, तो कई छात्र पत्र के द्वारा अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुचाने का प्रयास कर रहे है। गौरतलब हैं कि पिछले वर्ष भी कई छात्र एंव छात्राएं ऐसे थे जो छात्रवृत्ति के आवेदन से वंचित रहे गए थे। जिनका प्रवेश होने से पहले ही छात्रवृत्ति के आवेदन का समय खत्म हो गया था और छात्र छात्रवृत्ति से वंचित रहे गए थे। कई छात्र ऐसे थे जिन छात्रों की फीस छात्रवृत्ति के द्वारा ही जानी थी मगर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन ही नहीं कर पाने की वजह से उन छात्रों को अपना प्रवेश रद्द कराना पड़ा। 
पिछले वर्ष भी कई छात्रा एंव छात्राओं ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से गुहार लगाई थी मगर उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया, मगर इस बार प्रदेश में योगी आदित्नाथ की सरकार है तो बच्चों को मुख्यमंत्री से पूरी आशा है कि मुख्यमंत्री इस बार उन्हें निराश नहीं करेंगे। बता दें कि समाज कल्याण की लापरवाही से परेशान होकर छात्रों उसके दफ्तर के बाहर प्रदर्शन भी किया, लेकिन उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। इसके साथ छात्र एंव छात्राए समाज कल्याण अधिकारी हार्षिता माथुर से भी मिले लेकिन वो भी छात्रों को केवल तसल्ली देने तक ही सीमित रही और अधिकारीक तौर पर कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे छात्रों में उनके खिलाफ रोक्ष देखने को मिल रहा है। 
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