25 वो आदिवासी जिन्हें कर दिया गया था गुमराह, उन्होंने फिर से ओढ़ लिया भगवा.. लौटे सत्य सनातन की शरण में

क्रिस्चियन मिशनरियों के झांसे में आकर वो आदिवासी ईसाई बन गये लेकिन फिर उन्हें सच का ज्ञान हुआ तथा उन्होंने वापस भगवा ओढ़कर सनातन में वापसी कर ली हैं. मामला झारखण्ड के गुमला जिले का है जहाँ हिन्दू  धर्म के सरना संप्रदाय से आने वाले इन आदिवासी परिवारों ने ईसाई मिशनरियों के प्रलोभन में फँस कर अपना धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म को अपना लिया था, लेकिन अब इन्होने हिन्दू जागरण मंच के सहयोग से पुनः भगवा ओढ़ लिया है तथा अपने हिन्दू धर्म में लौट आए हैं.

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, गुमला जिला के भरनो प्रखंड स्थित मसिया महुआटोली गाँव के 10 आदिवासी परिवारों ने ग़रीबी के कारण ईसाई धर्म को अपना लिया था, ग्राम प्रधान ने 22 जून को सभी के पाँव धो कर इन्हें इनके धर्म में वापसी करवाई. हिन्दू जागरण मंच ने हिन्दू धर्म छोड़ ईसाई बने लोगों को समझाया तथा उन्हें घर वापसी के  लिए तैयार किया. बताया गया है कि धर्म परिवर्तन कराने वाले अधिकतर लोग बीमारी से पीड़ित थे और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. ईसाई मिशनरियों ने उन्हें गुमराह कर ईसाई बना दिया था.

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बताया गया है कि आदिवासी सरना विकास समिति और झारखंड जनजातीय सुरक्षा मंच ने भी घर वापसी की इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई. देवी मंडप में पूजा करा कर और प्रक्रिया में शामिल लोगों को अंगवस्त्र दे कर उनका ‘शुद्धिकरण’ किया गया, इसके बाद ‘घर वापसी’ कराई गई. घर वापसी करने वाले परिवार के सदस्यों ने धर्म परिवर्तन करने का कारण बताते हुए कहा कि उनके परिवारों में मिरगी, यक्ष्मा, गठिया आदि बीमारियों से आक्रांत लोग हैं. वे लोग करीब एक दशक से इन बीमारियों से पीड़ित हैं.

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उन लोगों ने बताया कि चर्च के पादरियों ने उन्हें बहलाया-फुसलाया और धर्म परिवर्तन कराने को कहा. पादरियों ने कई अन्य प्रकार के प्रलोभन देते हुए बीमारी ठीक कर देने का भी आश्वासन दिया. पादरियों ने उन्हें बताया कि ईसाई चंगाई सभा में जाने से ऐसी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं. जब हिन्दू जागरण मंच के लोगों को यह बात पता चली तो उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को समझाना शुरू किया. इसके बाद इन लोगों की ‘घर वापसी’ हो सकी.

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