कर्नाटक में सरकार बनते ही भाजपा ने धोया टीपू नाम का कलंक..हर तरफ मुक्त कंठ से प्रसंशा

वो हिन्दुओ का हत्यारा था इसमें किसी को कोई शक नहीं . उसने अपनी आत्मकथा में जो चीज खुद से स्वीकार की उसको न जाने क्यों खुद से बनाये सेकुलर सिद्धांतो के स्वामी स्वीकार करने को तैयार ही नहीं थे.. उसकी दरिंदगी की दास्तान आज भी कर्नाटक का मैसूर इलाका बताया करता है .. धर्मांतरण से ले कर आतंक तक , ऐसा कौन सा काम था जिसको उसने करवाया नहीं था . लेकिन उसके बाद भी उसकी जयंती धूमधाम से मनाई जा रही थी भारत के एक राज्य में ..

भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही कर्नाटक में टीपू सुल्तान की उस जयंती को मनाने पर रोक लगा दी गई है जिसको रोकने के लिए कई हिंदूवादी सन्गठन के लोग अपनी जान तक दे चुके हैं .. भारतीय जनता पार्टी की सरकार येदुरप्पा के नेतृत्व में बनी है जिस से वहां के मजहबी चरमपंथ पीडितो को बहुत आशा थी और उस आशा पर पहला ही कदम बढ़ा कर उन्होंने इसको सही साबित करने का प्रयास किया है . कर्नाटक अन्य कई महापुरुषों की जन्म व कर्मस्थली रहा है लेकिन कांग्रेस को टीपू से ही लगाव क्यों था ये कईयों की समझ के बाहर है .

कर्नाटक में सिद्धारमैया की अगुआई वाली पिछली कांग्रेस सरकार ने 2016 से मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाना शुरु किया था और तब से ही हर साल इन समारोहों के विरोध में प्रदर्शन होते रहे थे. टीपू जयंती का विरोध करने वाली बीजेपी टीपू सुल्तान को “अत्याचारी” और “हिंदू-विरोधी” बताती है. इस फैसले के समर्थन में दक्षिण बेगलुरु के भारतीय जनता पार्टी संसद ने कहा, “‘टीपू सुल्तान एक अत्याचारी था जिसने हज़ारों लोगों की हत्या की और ये शर्मनाक है कि पहले की सरकारों ने उनके सम्मान में जयंती मनाई. बीएस येदियुरप्पा सरकार अब पिछले गठबंधन के ग़लत फैसलों को सुधार रही है.”

 

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